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प्राकृतिक खेती से ही संभव है जहर मुक्त भोजन की थाली : सुभाष चंद्र

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08जेएनडी45: ​शिविर के समापन पर मौजूद किसान व हमेटी के अ​धिकारी व कर्मचारी। स्रोत हमेटी।
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जींद। हमेटी में किसानों के लिए चलाए जा रहे प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण का बुधवार को समापन हो गया। इसमें 50 किसानों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के समापन पर प्राकृतिक खेती के ट्रेनर डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि प्राकृतिक खेती से फल, सब्जी व अनाज उत्पादन करके हम अपने खाने की थाली को जहर मुक्त कर सकते हैं।
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उन्होंने बताया कि रासायनिक कीटनाशकों और खादों के अंधाधुंध प्रयोग ने तो भोजन को जहरीला बना दिया है। अनाज, फलों व सब्जियों में किए जा रहे जहरीले कीटनाशकों के अवशेषों का स्तर भोजन में निरंतर बढ़ रहा है। यह हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को खत्म कर रहा है। यही कारण है कि आज कैंसर, ह्रदय घात जैसी जानलेवा बीमारियां निरंतर बढ़ रही हैं। इससे न केवल मनुष्य का स्वास्थ्य खराब हो रहा है, अपितु पशुओं की बीमारियों का भी यही हाल है। भूमि की उर्वरा शक्ति निरंतर घट रही है। खेती इतनी ज्यादा खर्चीली होती जा रही है।
30 क्विंटल प्रति एकड़ गेहूं-धान की पैदावार लेने के बाद भी किसान को शुद्ध आमदनी के नाम पर कुछ नहीं बच रहा। देसी गाय के गोबर व गोमूत्र और हमारे आसपास उगी हुई वनस्पतियों की मदद से खेती में प्रयोग होने वाले जैविक उर्वरक और जैविक कीट नियंत्रक तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसान का खेती में होने वाला खर्चा बच सकता है। प्राकृतिक तरीके से पैदा किए गए फल, सब्जी व अनाजों में जहर की मात्रा नहीं होती। इनमें पौष्टिकता भी ज्यादा होती है। इसलिए उपभोक्ताओं की कोशिश यही होनी चाहिए कि वह प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से ही अपने खाने के लिए फल, सब्जियां, दाल आदि खरीदें।
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