07जेएनडी24: नागरिक अस्पताल का ब्लड बैंक। संवाद
जींद। जिले के नागरिक अस्पताल में थैलेसीमिया से पीड़ित 35 मरीजों का इलाज चल रहा है। मरीजों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन, जांच और डॉक्टरों की निगरानी की सुविधा तो मिल रही है इसके बावजूद मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
मरीज के परिजन ने बताया कि थैलेसीमिया वार्ड में मूलभूत सुविधाएं पर्याप्त नहीं हैं। वार्ड में अटैच बाथरूम नहीं है। इससे बच्चों और गंभीर मरीजों को दिक्कत होती है। पीने के पानी की व्यवस्था भी ठीक नहीं है। कई बार परिजनों को बाहर से पानी लाना पड़ता है।
इसके अलावा आयरन कंट्रोल और अन्य जरूरी दवाएं कई बार अस्पताल में उपलब्ध नहीं होतीं। डॉक्टर जो दवा लिखते हैं, वह बाहर से निजी मेडिकल स्टोर से खरीदनी पड़ती है। इससे इलाज का खर्च बढ़ जाता है।
थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों को बार-बार खून चढ़ाने की पड़ती है जरूरत
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रक्त विकार है। इसमें शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता। थैलेसीमिया से पीड़ित मरीजों को बार-बार खून चढ़ाने की जरूरत पड़ती है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चों में जीन के माध्यम से पहुंचती है। अगर दोनों माता-पिता थैलेसीमिया माइनर के वाहक हों, तो बच्चे में थैलेसीमिया मेजर होने का खतरा बढ़ जाता है।
थैलेसीमिया के लक्षण
थैलेसीमिया के मरीजों में लगातार कमजोरी, थकान, त्वचा का पीला पड़ना, सांस लेने में परेशानी, पेट में सूजन और बच्चों की शारीरिक वृद्धि प्रभावित होने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। कई मरीजों में हड्डियों की बनावट में बदलाव और पेशाब का रंग गहरा होने की समस्या भी सामने आती है। नागरिक अस्पताल में मरीजों को हर तीन से चार सप्ताह में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की सुविधा दी जा रही है। साथ ही शरीर में बढ़ने वाले आयरन को नियंत्रित करने के लिए आयरन चिलेशन थेरेपी भी दी जाती है।
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थैलेसीमिया की नियमित जांच करवानी चाहिए ताकि बीमारी की रोकथाम की जा सके। यदि इसकी समय पर जांच हो तो नियमित इलाज से थैलेसीमिया मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं। अस्पताल में जो सुविधाएं मरीजों को चाहिए वह उपलब्ध करवाई जाएंगी।
-डॉ. सुमन कोहली, सीएमओ नागरिक अस्पताल जींद