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एंबुलेंस चालकों की भर्ती में आउटसोर्स एजेंसी और फ्लीट की लापरवाही आई सामने

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नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस। - फोटो : Jind
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नागरिक अस्पताल जींद में एंबुलेंस चालकों की भर्ती के मामले में काफी अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच में सामने आया है कि चालक पद के लिए मेडिकल फिटनेस, कलर ब्लाइंड, मेडिकल जांच और सबसे जरूरी ड्राइविंग का हैवी लाइसेंस जो कम से कम तीन वर्ष पुराना हो, सभी नियमों को दरकिनार किया गया। इसमें रेफरल ट्रांसपोर्ट मैनेजर दिनेश कुमार व आउटसोर्स एजेंसी ने स्वास्थ्य विभाग को गुमराह किया। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंप दी है। अब इस पर कार्रवाई सिविल सर्जन द्वारा की जाएगी।
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जानकारी के लिए नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस के लिए आउटसोर्स एजेंसी के तहत चालकों की भर्ती की गई थी। कुल 10 चालकों में से तीन की भर्ती डेढ़ वर्ष पहले, दो चालकों की भर्ती नवंबर-दिसंबर 2019 तथा पांच चालकों की भर्ती अप्रैल 2020 में की गई। चालक पद पर भर्ती होने के बाद जरूरी कागजात फ्लीट मैनेजर दिनेश के पास जमा करवाए जाने थे। चालकों के लिए मेडिकल फिटनेस, कलर ब्लाइंड की जांच जरूरी थी। इसके अलावा तीन वर्ष पुराना हैवी लाइसेंस होना चाहिए था। जब अस्पताल प्रशासन को पता चला तो इसकी जांच शुरू हुई। जांच के दौरान मैनेजर दिनेश कुमार से सभी चालकों का रिकार्ड मांगा गया। इसमें आउटसोर्स एजेंसी तथा रेफरल ट्रांसपोर्ट मैनेजर की लापरवाही सामने आई है। तीन सदस्यीय कमेटी द्वारा की गई जांच में यह निष्कर्ष निकला है कि चालक संजय, कुलदीप, रोशनलाल को रखते हुए मिशन निदेशक के आदेशों की अवहेलना की गई। मैनेजर दिनेश ने चालकों के पूरे रिकार्ड कमेटी को नहीं दे सके। अजय और नरेश की लाइसेंस अवधि तीन वर्ष से कम है, जोकि आउटसोर्स के तहत चालक रखने के लिए अयोग्य है। आउटसोर्स एजेंसी ने भी कर्मचारियों से संबंधित रिकार्ड व मेडिकल को लेकर विभाग को गुमराह किया है।
जांच रिपोर्ट मिल चुकी है। उसे देख रहे हैं। मामला गंभीर है। जल्द ही इस पर कार्रवाई की जाएगी। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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डॉ. मनजीत सिंह, सिविल सर्जन, जींद।
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