जींद। छठ पूजा का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा इसको लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह बना हुआ है। पर्व के चलते खरना के दिन रविवार को श्रद्धालुओं ने प्रसाद तैयार करके छठ मैया को भोग लगाया।
छठ मैया की पूजा-अर्चना करके श्रद्धालुओं ने 36 घंटे का कठोर निर्जला व्रत शुरू किया। श्रद्धालु 27 अक्टूबर को अस्ताचलगामी सूर्य देव को अर्घ्य देकर आराधना करेंगे। 28 अक्टूबर को उगते सूर्य को अध्यं देकर श्रद्धालु घर-परिवार की सुख-समृद्धि के लिए मन्नतें मांगेंगे।
श्रद्धा, सूर्य उपासना का छठ महापर्व 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ। छठ महापर्व मुख्य रूप से पूर्वांचल क्षेत्र बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड में मनाया जाता है। जींद में रह रहे पूर्वांचल के 2 हजार परिवार भी छठ महापर्व को उत्साह पूर्वक मनाने में लगे।
खरना के दिन महिलाओं ने मिट्टी के चूल्हे को साफ करके प्रसाद बनाया। चूल्हे में आम की लकड़ी जलाकर पीतल के बर्तन में गुड़, चावल, दूध की खीर तैयार की। साथ ही गेहूं के आटे से बनी रोटी, पूड़ी, ठेकुआ भी बनाए।
खीर के प्रसाद का छठ मइया को भोग लगाने के बाद श्रद्धालुओं ने भी प्रसाद ग्रहण किया। प्रसाद ग्रहण करने के बाद श्रद्धालुओं ने 36 घंटे का व्रत शुरू किया। पूर्वांचल के लोग 27 अक्टूबर को अपने परिवार के साथ पिंडारा, रानी तालाब, हांसी ब्रांच नहर घाट पर जाएंगे।
डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर श्रद्धालु संतान सुख, परिवार के कल्याण के लिए सूर्य देव से आशीर्वाद प्राप्त करेंगे। 28 अक्टूबर को छठ महापर्व के चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इस दिन ही व्रती श्रद्धालु अर्घ्य के बाद पारण करेंगे।
श्रद्धालु अजीत गौतम, शंभू साहू, दिनेश, राकेश, दिनकर साहू, अमन ने बताया कि छठ मइया की पूजा-अर्चना से वे अपने जीवन में परिवर्तन महसूस कर चुके। छठ मइया श्रद्धालुओं के घर-आंगन को खुशियों से भर देती है। छठ मैया के श्रद्धालुओं के घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं रहती।