जींद। इस बार चैत्र माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि आठ अप्रैल को है। सोमवार को होने के कारण इसे सोमवती अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन देवों के देव महादेव और मां पार्वती की विशेष पूजा और व्रत करने का विधान है। इसके साथ ही पितरों का तर्पण किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्रती को अखंड सौभाग्य, खुशहाली और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। पंचांग के अनुसार चैत्र माह कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि का प्रारंभ आठ अप्रैल को सुबह तीन बजकर 21 मिनट से होगा और इस तिथि का समापन इसी दिन रात को 11 बजकर 50 मिनट पर होगा।
वर्ष 2024 की पहली सोमवती अमावस्या आठ अप्रैल (सोमवार) को है। ऐसे में पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर सोमवार को सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु सरोवर में स्नान कर तर्पण करेंगे। श्रद्धालुओं की भीड़ की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने भी तैयारियां शुरू कर दी हैं। स्पेशल पुलिसकर्मियों की डयूटी लगाई गई हैं। वहीं वॉलंटियर व श्रद्धालु व्यवस्था की कमान संभालेंगे। जींद-गोहाना मार्ग पर जाम की स्थिति न रहे, इसके लिए ट्रैफिक पुलिस भी कमान संभाले रहेगी।
2024 में तीन सोमवती अमावस्या के बनेंगे योग
पहला योग आठ अप्रैल को।
दूसरा योग दो सितंबर को
तीसरा योग 30 दिसंबर को
यह रहेगी सोमवती अमावस्या की पूजा-विधि
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि सुबह जल्दी उठकर स्नान करें। इस दिन पवित्र नदी या सरोवर में स्नान करने का विशेष महत्व रहता है। अगर सरोवर या नदी में स्नान नहीं किया जा सकता है तो घर पर ही नहाने के पानी में गंगा जल डालकर स्नान कर सकते हैं। स्नान करने के पश्चात घर के मंदिर में दीप प्रज्ज्वलित करें। सूर्य देव को अर्ध्य दें। अगर उपवास रख सकते हैं तो अवश्य रखें। पितरों के निमित्त तर्पण और दान अवश्य करें। अपने ईष्ट देव का अधिक से अधिक ध्यान करें।
फाल्गुन की अमावस्या में पूजा व पितृ तर्पण का विशेष महत्व
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह की अमावस्या विशेष होती है। पूर्वजों की कृपा से परिवार में खुशहाली और समृद्धि आती है। इसके अलावा सोमवार के दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं।