23जेएनडी03-हरियाली अमावस्या पर पांडू पिंडारा तीर्थ में स्नान करते हुए श्रद्धालु। संवाद
जींद। पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर शनिवार को हरियाली अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान किया। पिंडदान कर पितृ तर्पण कर सुखद भविष्य की कामना की। अमावस्या को देखते हुए तीर्थ पर पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। ऐतिहासिक पिंडतारक तीर्थ पर शुक्रवार शाम से ही श्रद्धालु पहुंचना शुरू हो गए थे।
इस दौरान धर्मशालाओं में सत्संग व कीर्तन का आयोजन चलता रहा। शनिवार अल सुबह ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान व पिंडदान शुरू कर दिया जो मध्याह्न के बाद तक चलता रहा। इस मौके पर दूर दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया और सूर्यदेव को जलार्पण करके सुख समृद्धि की कामना की।
पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। तभी से यह माना जाता है कि पांडु पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है।
महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं। श्रद्धालुओं ने यहां खरीददारी भी की। जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने कहा कि हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को विशेष तिथि के रूप में देख जाता है।
इस दिन पूर्वजों के निमित्त पिंडदान एवं दान और पुण्य के कार्य किए जाते हैं। हरियाली अमावस्या पर्व जीवन में पर्यावरण के महत्व को भी बताता है। इस दिन नए पौधे लगाए जाएं तो जीवन के सारे कष्ट दोष दूर हो जाते हैं और सुख-समद्धि का आगमन होता है। यह तिथि किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन किसान अपने खेती में उपयोग होने वाले उपकरणों की पूजा करते हैं और ईश्वर से अच्छी फसल होने की कामना करते हैं।
23जेएनडी03-हरियाली अमावस्या पर पांडू पिंडारा तीर्थ में स्नान करते हुए श्रद्धालु। संवाद
23जेएनडी03-हरियाली अमावस्या पर पांडू पिंडारा तीर्थ में स्नान करते हुए श्रद्धालु। संवाद