गांव कंडेला में रविवार को गांव की सभी बिरादरियों के लोगों की हुई बैठक में सर्वसम्मति से ओमप्रकाश कंडेला को दोबारा से कंडेला खाप का प्रधान नियुक्त किया है। ओमप्रकाश कंडेला को चार महीने पहले प्रधान नियुक्त किया था, लेकिन उस समय मनमुटाव होने के कारण 14 अप्रैल को उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उस समय प्रधान रहे टेकराम कंडेला ने भी इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद खाप में आने वाले सभी 14 गांवों के लोगों ने कंडेला गांव पर ही अपना प्रधान चुनने का फैसला छोड़ दिया था। रविवार को गांव की पंचायत ने सर्वसम्मति से ओमप्रकाश को खाप प्रधान चुन लिया।
देश की प्राचीनतम व प्रभावशाली खापों में शुमार कंडेला खाप को आखिरकार चार महीने बाद पूर्ण सहमति के साथ नया प्रधान मिल गया। गांव के सरपंच अजमेर सिंह ने बताया कि चार महीने पहले गांव के काफी लोगों ने ओमप्रकाश को खाप का प्रधान चुन लिया था। लेकिन कुछ लोगों ने इस पर एतराज जताया था। इसके बाद खाप में आने वाले सभी 14 गांवों के लोगों की बैठक 14 मार्च को हुई। इसमें ओमप्रकाश तथा टेकराम कंडेला ने अपना इस्तीफा दे दिया था। लेकिन इस पंचायत में प्रधान के बारे में कोई निर्णय नहीं हो पाया। अन्य गांवों के लोगों ने दो महीने का समय देते हुए कंडेला गांव के लोगों को प्रधान चुनने के लिए कहा था। रविवार को हुई पंचायत में ओमप्रकाश को खाप का प्रधान चुन लिया गया। इसमें सभी लोगों ने कहा कि खाप का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं होगा। खाप के नाम पर कोई भी व्यक्ति किसी भी पार्टी के समर्थन में न तो भाषण देगा और न ही उसका समर्थन करेगा। किसी को किसी पार्टी के बारे में बोलना है या समर्थन देना है तो वह उसका व्यक्तिगत मत होगा।
1993 से लगातार प्रधान रहे हैं टेकराम कंडेला
टेकराम कंडेला 1993 से लगातार खाप के प्रधान रहे हैं। इस दौरान कई सामाजिक व राजनीतिक मुद्दों पर खाप ने अपनी ताकत दिखाई है। टेकराम कंडेला द्वारा राजनीतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से खाप के लोग काफी नाराज थे। अब खाप ने ओमप्रकाश के रूप में नया प्रधान चुन लिया है।
जिले की राजनीति में खास भूमिका रखती है कंडेला खाप
कंडेला खाप के अंतर्गत पहले 28 गांव आते थे। लेकिन बाद में खेड़ा खाप के नाम से 14 गांव अलग हो गए। लेकिन अब भी यह लोग एक ही नजर आते हैं। यह सभी गांव तीन विधानसभा क्षेत्रों जींद, उचाना व जुलाना में फैले हैं। ऐसे में राजनीतिक रूप से भी कंडेला खाप की खास भूमिका रहती है। वहीं 2001 में हुए किसान आंदोलन में कंडेला गांव ही आंदोलन का केंद्र रहा। इसके बाद से कंडेला खाप को नई पहचान मिली है।