जींद। राशन डिपो पर घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटने वाले उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जिले के डिपो धारकों को नई 5जी मशीनें उपलब्ध कराई हैं। इनमें अंगूठे के साथ-साथ आंखों की पुतली (आईरिस) स्कैन करने की सुविधा भी होगी। इससे उन बुजुर्गों, मजदूरों और बच्चों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा, जिनके फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने के कारण उन्हें राशन नहीं मिल पाता था।
जिले में विभाग के पास 563 नई मशीनें पहुंच चुकी हैं। इन मशीनों का लाभ जिले के दो लाख 25 हजार 54 उपभोक्ताओं तथा आठ लाख 76 हजार 87 यूनिट धारकों को मिलेगा। विभाग का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद कोई भी पात्र उपभोक्ता बिना राशन लिए वापस नहीं लौटेगा।
फिंगरप्रिंट स्कैनिंग में कई बार बुजुर्गों, दिहाड़ी मजदूरों और छोटे बच्चों के फिंगरप्रिंट मिलान न होने के कारण उन्हें कई बार डिपो के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई लोगों को बिना राशन लिए ही घर लौटना पड़ता था।
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ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण भी मशीनें अक्सर काम नहीं करती थीं। मशीन हैंग होने या सर्वर डाउन रहने से लंबी कतारें लग जाती थीं। महिलाओं, बुजुर्गों और दिव्यांगों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ती थी। कई बार उपभोक्ताओं और डिपो धारकों के बीच विवाद की स्थिति भी बन जाती थी।
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नई 5जी मशीनों में आईरिस स्कैनिंग यानी आंखों की पुतली से पहचान की सुविधा दी गई है। यदि किसी व्यक्ति का अंगूठा स्कैन नहीं होता है तो उसकी आंखें स्कैन कर राशन दिया जा सकेगा। इससे पात्र लाभार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार नई मशीनें तेज नेटवर्क पर आधारित हैं, जिससे सर्वर संबंधी दिक्कतें भी कम होंगी।
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इन मशीनों को इलेक्ट्रॉनिक कांटे के साथ जोड़ा गया है। इससे राशन वितरण के दौरान तोल में गड़बड़ी की संभावना भी कम होगी। उपभोक्ता को जितना राशन दर्ज होगा, उतना ही राशन मिलने की पुष्टि मशीन के माध्यम से हो सकेगी। विभाग का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतों में कमी आएगी।
वर्जन
नई मशीनों को चरणबद्ध तरीके से सभी डिपो पर लगाया जा रहा है। मशीनों के संचालन के लिए डिपो धारकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिले में आधे से अधिक डिपो पर ये मशीनें लगाई जा चुकी हैं। जल्द ही इनमें आंखों की स्कैनिंग की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
—राजेश आर्य, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक, जींद