जिला परिषद अध्यक्षा मनीषा रंधावा के भाजपा में शामिल होते ही उनके खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पूरी तरह से असफल हो गया। सोमवार को प्रस्ताव पर मतदान होना था, लेकिन विरोधी गुट का एक भी पार्षद वोटिंग के लिए नहीं पहुंचा। 30 मिनट तक इंतजार करने के बाद, बैठक की अध्यक्षता कर रहे डीसी मोहम्मद इमरान रजा ने प्रस्ताव को असफल घोषित कर दिया।
कैसे बची चेयरपर्सन की कुर्सी
जनवरी 2022 में मनीषा रंधावा जेजेपी के समर्थन से महज एक वोट से जिला परिषद अध्यक्षा बनी थीं। लेकिन पिछले साल उनके पति कुलदीप रंधावा जेजेपी छोड़कर कांग्रेस में चले गए। इसके बाद, 2 दिसंबर 2024 को 18 पार्षदों ने उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग की। हालांकि, भाजपा के समर्थन से मनीषा रंधावा ने अपनी कुर्सी बचा ली।
विरोधी खेमा बैकफुट पर, अब भाजपा संग मिलकर होगा विकास
अविश्वास प्रस्ताव असफल होने के बाद, विरोधी खेमें के मुख्य चेहरे वाइस चेयरमैन सतीश हथवाला ने कहा कि भाजपा नेतृत्व के निर्देश के कारण उन्होंने बैठक में भाग नहीं लिया। अब जब चेयरपर्सन भाजपा में शामिल हो चुकी हैं, तो सभी मिलकर जिले के विकास के लिए काम करेंगे।