संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली में जहां लोग प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं, वहीं अर्बन इस्टेट निवासी प्राध्यापिका डॉ. नीलम ने अपने घर को हरियाली और रंग-बिरंगे फूलों से सुंदर बगिया में बदल दिया है। लगभग 10 वर्षों से बागवानी को शौक के रूप में अपनाए हुए नीलम आज अपने घर में 70 से अधिक फूलों और सजावटी पौधों की देखभाल स्वयं करती हैं। अलेवा कॉलेज में प्राध्यापिका के पद पर कार्यरत नीलम बताती हैं कि उन्हें बागवानी की प्रेरणा अपने पति से मिली। शुरुआत में उन्होंने उनके साथ मिलकर पौधों की देखभाल करना सीखा लेकिन धीरे-धीरे यह शौक उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बन गया।
अब वह अपनी नौकरी और घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ पौधों के लिए भी नियमित समय निकालती हैं। उनकी बगिया में मौसमी फूल, सजावटी पौधे और औषधीय गुणों वाले पौधे शामिल हैं।
सुबह और शाम पौधों को पानी देना, उनकी छंटाई करना और समय-समय पर खाद डालना उनकी रोजमर्रा की आदत बन चुकी है। इसी देखभाल का परिणाम है कि उनका घर हमेशा ताजगी और प्राकृतिक सौंदर्य से भरा रहता है।
नीलम का मानना है कि पौधे केवल घर की शोभा नहीं बढ़ाते, बल्कि मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा भी देते हैं। उनका कहना है कि हर व्यक्ति को अपने घर में पौधे जरूर लगाने चाहिए ताकि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिल सके।
डॉ. नीलम अपने विद्यार्थियों को भी पौधरोपण और बागवानी के लिए प्रेरित करती हैं। कॉलेज में विभिन्न कार्यक्रमों के दौरान वह छात्रों को पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संदेश देती हैं। उनका मानना है कि यदि युवा पीढ़ी प्रकृति से जुड़ेगी तो पर्यावरण संबंधी चुनौतियों का समाधान आसान होगा।