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प्राकृतिक खेती पर्यावरण संरक्षण का सबसे प्रभावी माध्यम : यादव

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05जेएनडी12: प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण ​शिविर के समापन पर पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे - फोटो : विकास प्राधिकरण सभागार में आयोजित बैठक में मौजूद कारखानेदार व श्रमिक संगठन पदाधिकारी। स्रोत: विभाग
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जींद। हरियाणा कृषि प्रबंधन एवं विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (हमेटी) में सामुदायिक संसाधन व्यक्ति किसानों के लिए आयोजित पांच दिवसीय प्राकृतिक खेती प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुक्रवार को समापन हुआ। समापन पर संस्थान के निदेशक डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव ने प्रतिभागी किसानों को प्रमाण-पत्र वितरित कर सम्मानित किया और प्राकृतिक खेती को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
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डॉ. यादव ने कहा कि वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण विश्व की सबसे बड़ी जरूरत बन गया है। प्राकृतिक खेती न केवल मिट्टी, जल और वायु को सुरक्षित रखती है बल्कि मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने कहा कि रासायनिक खेती के कारण भूमि की उर्वरता प्रभावित हो रही है, जबकि प्राकृतिक खेती मिट्टी की गुणवत्ता को पुनर्जीवित करने का कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। इस अभियान में सीआरपी किसानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। प्रशिक्षित किसान गांव-गांव जाकर अन्य किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करेंगे और इसके सफल मॉडल विकसित करने में योगदान देंगे। इस अवसर पर हमेटी परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
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मुख्य प्रशिक्षक डॉ. सुभाष चंद्र ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत, मल्चिंग तथा विविध फसली प्रणाली जैसी प्राकृतिक खेती की तकनीकों की व्यावहारिक जानकारी दी गई।
उन्होंने कहा कि सीआरपी किसान प्राकृतिक खेती के विस्तार में परिवर्तन के वाहक के रूप में कार्य करेंगे। साथ ही सरकार द्वारा उन्हें इस कार्य के लिए मानदेय भी प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में किसानों को सफल प्राकृतिक खेती मॉडल, खेत भ्रमण और व्यवहारिक प्रदर्शन के माध्यम से भी प्रशिक्षित किया गया।
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