10जेएनडी28: प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत व घनजीवामृत बनाने की विधि सिखाते हुए डॉ. सुभाष। स्रो
जींद। प्राकृतिक खेती न केवल किसानों की लागत कम करती है बल्कि उपभोक्ताओं को जहरमुक्त भोजन और प्रकृति को सुरक्षित वातावरण प्रदान करती है। इस प्रकार प्राकृतिक खेती किसान, उपभोक्ता और प्रकृति के लिए वरदान साबित हो रही है।
यह बातें हमेटी जींद के निदेशक डॉ. कर्म चंद ने गांव अहिरका स्थित एस एंड एस ऑर्गेनिक फार्म पर आयोजित प्राकृतिक खेती पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कही। डॉ. कर्म चंद ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से खेती में होने वाला खर्च कम होता है और भूमि की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। उपभोक्ताओं को रसायन मुक्त भोजन मिलता है।
इससे कैंसर, हृदयाघात जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है। वहीं प्रकृति के प्रत्येक जीव की सुरक्षा होती है, वायु प्रदूषण में कमी आती है तथा जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने रसायनिक खेती पर चिंता जताते हुए कहा कि कीटनाशकों और रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग ने खेतों की मिट्टी में मौजूद लाभकारी जीवाणुओं को नष्ट कर दिया है।
इससे मिट्टी की उर्वरता घटती जा रही है और किसानों को अधिक मात्रा में यूरिया व अन्य रसायनिक खाद डालनी पड़ रही है। इससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। साथ ही खाद्यान्न में जहरीले रसायनों के अवशेष बढ़ने से मानव और पशुओं में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं। प्राकृतिक खेती में देसी गाय के गोबर और गोमूत्र से बने जीवामृत व घनजीवामृत के प्रयोग से मिट्टी में लाभकारी सूक्ष्म जीवों की संख्या तेजी से बढ़ती है, जो फसलों के उत्पादन में सहायक होते हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे कम से कम एक या दो एकड़ में प्राकृतिक खेती की शुरुआत जरूर करें, ताकि अपने परिवार, पशुधन और भूमि को सुरक्षित रख सकें।
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हमेटी के प्राकृतिक खेती प्रशिक्षक एवं एस एंड एस ऑर्गेनिक फार्म के किसान डॉ. सुभाष चंद्र ने किसानों को फेरोमोन ट्रैप और पीले चिपचिपे कार्डों के माध्यम से गैर-रसायनिक कीट नियंत्रण के तरीके सिखाए। उन्होंने जीवामृत व घनजीवामृत बनाने की विधि तथा फसलों में उनके प्रयोग की जानकारी दी। साथ ही उत्पादों के बेहतर दाम पाने के लिए प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन पर भी प्रकाश डाला।
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10जेएनडी28: प्राकृतिक खेती के लिए जीवामृत व घनजीवामृत बनाने की विधि सिखाते हुए डॉ. सुभाष। स्रोत: किसान