हरियाणा में भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक घासी राम नैन की चौथी पुण्यतिथि सोमवार को बद्दोवाल टोल प्लाजा पर मनाई गई। इस मौके पर भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत सहित कई किसान नेता मौजूद रहे। दूसरी जगह कार्यक्रम होने के चलते राकेश टिकैत कार्यक्रम में नहीं पहुंच पाए। इस दौरान नरेश टिकैत ने कहा कि दिल्ली जाने का कोई कार्यक्रम नहीं है। यदि दिल्ली जाना होता तो कब के चले गए होते। अब देश भर में किसान आंदोलन को फैलाया जाएगा। इस दौरान हजारों की संख्या में किसान शामिल हुए।
नरेश टिकैत ने कहा कि ऐसे ही शांतिपूर्वक ढंग से आंदोलन जारी रखना है, विजय किसानों की होगी। मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर में जो नारा लगाया गया, वह 1987 से चला आ रहा है। किसान नेता बड़े टिकैत (महेंद्र सिंह टिकैत) ने यह नारा दिया था। उनके अनुसार, मुस्लिम भाई अल्ला हु अकबर के जवाब में हर हर महादेव कहेंगे, हिंदू भाई हर हर महादेव के जवाब में अल्ला हु अकबर कहेंगे। इस मौके पर किसान नेता दर्शन पाल सिंह, टीकरी बार्डर से महिला नेता सुदेश गोयत, किसान नेता आजाद सिंह पालवा, डॉ. सिकिक्म, ईश्वर सिंह दनौदा मौजूद रहे।
घासीराम नैन का जन्म जींद जिले के लोहबच गांव में हुआ था। 2002 में हुए किसान आंदोलन में घासीराम नैन अग्रिम पंक्ति के नेता रहे। 2002 में बिजली बिलों के विरोध में किए गए आंदोलन के दौरान प्रदेश में ओमप्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री थे। घासीराम नैन के नेतृत्व में चले आंदोलन में हालांकि पुलिस की गोली लगने से दस किसानों की जान गई थी, लेकिन किसानों ने सरकार को घुटना टेकने पर मजबूर कर दिया था।
इस दौरान नरेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन की सबसे बड़ी जीत तो यही है कि देश के किसान संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले एकजुट हो गए हैं। टिकैत के अनुसार, तानाशाह सरकार के सामने आंदोलन के सिवाय कोई ओर रास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि किसानों के जाने से दिल्ली की जनता परेशान हो।
बद्दोवाल टोल प्लाजा के मंच से किसान नेता नरेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन का समाधान सरकार को करना है। सरकार को बातचीत करनी चाहिए। दो कदम सरकार पीछे हटे तो किसान भी दो कदम पीछे हटेंगे।
इस दौरान किसान नेता दर्शनपाल सिंह ने कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर किसान एक ओर का सर्विस रोड खोलने को तैयार हैं। फिलहाल दिल्ली की सीमाओं के अंदर बढ़ने की बजाय पूरे देश में आंदोलन को मजबूत करेंगे। किसान मोर्चा ने दिल्ली की सीमाओं से आगे बढ़ने पर कोई फैसला नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन को मजबूत करने के संगठन तैयार किए जा रहे हैं।