25जेएनडी24-नरेश कुमार के की अंतिम यात्रा में शामिल ग्रामीण। स्रोत ग्रामीण
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उचाना। बांग्लादेश के चटगांव में भारत के उच्चायोग में प्रोटोकॉल अधिकारी के तौर पर कार्यरत छात्तर निवासी नरेंद्र कुमार का हृदय गति रुकने से निधन हो गया। नरेंद्र चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे।
खटकड़ टोल से नरेंद्र कुमार पार्थिव शरीर गांव तक बाइकों के काफिले के साथ तिरंगा हाथों में लेकर युवा, ग्रामीण लेकर आए। विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री की पत्नी सुषमा अत्री अंतिम संस्कार में शामिल हुईं। नरेंद्र कुमार अपने माता-पिता के इकलौता बेटे थे। चंडीगढ़ पुलिस ने नरेंद्र कुमार को अंतिम सलामी दी।
बेटे के सिर से उठा बाप का साया
नरेंद्र कुमार का बेटा अर्श सिंह आठ साल का है। बेटे को ये नहीं पता कि उसका पिता अब वापस नहीं आएगा। 18 मई को नरेंद्र कुमार ने अपनी पत्नी से फोन पर दोपहर को बात की तो वो बिल्कुल सही थे। शाम को जब उनकी पत्नी ने संपर्क करना चाहा तो उनसे बात नहीं हुई। चचेरे भाई सुरेंद्र ने भी संपर्क करना चाहा लेकिन बातचीत नहीं हुई। 19 मई को चचेरे भाई सुरेंद्र के पास चटगांव से कॉल आई की नरेंद्र कुमार का निधन हो गया है जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई उसमें निधन हृदय गति रुकने से पाया गया। शादी को 15 साल हुए थे। पत्नी को यकीन नहीं हो रहा कि अब नरेंद्र कुमार कभी घर पर नहीं आएगा।
2008 में चंडीगढ़ पुलिस में हुए थे भर्ती
एक नवंबर 2008 को नरेंद्र कुमार चंडीगढ़ पुलिस में भर्ती हुआ था। चंडीगढ़ पुलिस की तरफ से भारत के उच्चायोग में प्रोटोकॉल अधिकारी के तौर पर गए चार साल हो चुके थे। अब भारत वापिस आने का समय था। बहुत मिलनसार स्वभाव का था। हर किसी के काम वो आता था। खुद का काम छोड़ कर दूसरे के काम करता था। भारत के उच्चायोग में प्रोटोकॉल अधिकारी के तौर पर सिलेक्ट होकर जाते हैं।
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