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36 उपस्वास्थ्य केंद्रों पर नहीं एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष)

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जींद। जिले के 36 उपस्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जहां पर कई वर्षों बाद भी एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के पद स्वीकृत नहीं हुए हैं। इस वजह से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इनमें से अधिकतर उपस्वास्थ्य केंद्र उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला के विधानसभा क्षेत्र उचाना कलां में हैं। स्वास्थ्य विभाग इन उपस्वास्थ्य केंद्रों में पद स्वीकृत करवाने के लिए 39 पत्र स्वास्थ्य महानिदेशक कार्यालय की योजना शाखा को लिख चुका है, लेकिन आज तक इन पत्रों का कोई जवाब नहीं आया है। अब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी गई है कि आखिर इन 39 पत्रों पर आज तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और इन पत्रों पर संज्ञान क्यों नहीं लिया गया।
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जिले में इस समय 183 उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें से 36 उपस्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जिनमें एमपीएचडब्ल्यू (पुरुष) के पद स्वीकृत ही नहीं हैं। एक उपस्वास्थ्य केंद्र पर एक दो एमपीएचडब्ल्यू के पद होते हैं। इनमें से एक महिला तथा एक पुरुष एमपीएचडब्ल्यू के पद होते हैं। साधारण बीमारियों के लिए एमपीएचडब्ल्यू लोगों को दवाइयां उपलब्ध करवाते हैं और घर-घर जाकर लोगों की जांच के लिए रक्त के नमूने आदि लेकर उनको उच्चाधिकारियों तक पहुंचाते हैं ताकि कोई महामारी या अन्य बीमारी हो तो उसका समय रहते पता लगाया जा सके। इस समय जिले के 36 उपस्वास्थ्य केंद्र ऐसे हैं, जिनमें एमपीएचडब्ल्यू पुरुष के पद ही स्वीकृत नहीं हैं। ऐसे में जिले में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। अधिकतर उपस्वास्थ्य केंद्र उचाना कलां विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। इस विधानसभा क्षेत्र से उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला हैं।
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अब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी जानकारी
स्वास्थ्य सुपरवाइजर संघ के प्रदेशाध्यक्ष राममेहर वर्मा ने कहा कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग ने पद स्वीकृति के लिए 39 बार स्वास्थ्य सेवाएं महानिदेशक कार्यालय को पत्र लिखे हैं। आज तक इन पत्रों का कोई जवाब नहीं आया है। पहला पत्र 2018 में लिखा गया था। अब सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सूचना मांगी गई है कि इन पत्रों पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई। यदि कोई कार्रवाई हुई है तो उसकी फाइल उपलब्ध करवाई जाए। इसके अलावा यह भी सूचना मांगी गई है कि इस मामले में किस शाखा द्वारा कार्रवाई की जानी है। उस शाखा का नाम तथा संबंधित अधिकारी का पदनाम भी बताया जाए।
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