जींद राजकीय आईटीआई में मुख्य सड़क पर बैठे बंदर। संवाद
जींद। शहर में बंदरों का आतंक दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। नागरिक अस्पताल, आईटीआई परिसर और अर्बन एस्टेट जैसे क्षेत्रों में रहने वाले लोग अब घर से बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं जहां आए दिन बंदरों के हमलों की घटनाएं सामने आ रही हैं।
प्रशासन की ओर से उठाए जा रहे कदमों के बावजूद समस्या का कोई समाधान नजर नहीं आ रहा। इससे निवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। इसके अलावा नागरिक अस्पताल जींद का परिसर अब बंदरों का अड्डा बन चुका है।
यहां सैकड़ों बंदर घूमते-फिरते नजर आते हैं और वे वॉर्ड्स में घुसकर खाने-पीने की चीजें छीन लेते हैं। मरीजों के अलावा डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ भी इनके हमलों का शिकार हो रहे हैं। अस्पताल कर्मचारी संघ के अध्यक्ष ने बताया कि 2020 से अब तक कई बार जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
आईटीआई परिसर में पढ़ने वाले छात्रों के लिए बंदरों का आतंक अब पढ़ाई में बाधा बन गया है। छात्रों का कहना है कि क्लासरूम के बाहर बंदर घुस आते हैं और किताब-कॉपी छीन लेते हैं।
आसपास के क्षेत्रों से बंदर शहर की ओर आ रहे हैं। लोग प्लास्टिक बैग और खुले में कचरा डालने से बचें ताकि बंदरों को भोजन न मिले। इसके कारण बंदरो से राहत मिल सकती है ।
घरों में कैद परिवार
अर्बन एस्टेट में रहने वाले परिवार तो घरों में कैद हो चुके हैं। राज कुमार गोयल जींद विकास संगठन के अध्यक्ष ने कहा कि लोग सुबह से शाम तक कमरों में बंद रहते हैं। झुंडो में बंदर घूमते हैं और हमला कर देते हैं। महिलाएं तो बिल्कुल बाहर नहीं निकल पातीं। निवासियों ने घरों पर लोहे की जाली लगानी शुरू कर दी है लेकिन यह खर्चा भी बोझ बन रहा है।
वर्जन
शहर में बंदरों को पकड़ने के लिए नगर परिषद की तरफ से काम किया जा रहा है ताकि शहर के लोगों को किसी प्रकार की परेशानी ना हो नगर परिषद बंदरों को पकड़ने के लिए जल्द ही काम शुरू करवाएगी, ताकि आमजन को कहीं पर भी बंदरो के काटने से परेशानी ना हो।-डॉ अनुराधा सैनी, नगर परिषद चेयरपर्सन जींद