जींद। राजकीय स्कूलों में स्कूल प्रबंधन कमेटी का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके लिए विद्यालय शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारी, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी, खंड संसाधन समन्वयक और स्कूल मुखिया, प्रभारी के नाम पत्र जारी किया है। स्कूलों में अलग-अगल छात्र संख्या के हिसाब से स्कूल प्रबंधन कमेटी का गठन किया जाएगा।
एक ही परिसर में प्राथमिक या उच्च प्राथमिक विद्यालय होने की स्थिति में वहां पर एक ही स्कूल प्रबंधन कमेटी बनेगी लेकिन इसमें प्रत्येक कक्षा के बच्चों के अभिभावकों का प्रतिनिधित्व अनिवार्य है। विद्यालय प्रबंधन समिति की आम सभा की बैठक वर्ष में तीन बार होगी। यह आम सभा 15 अगस्त, 26 जनवरी और मार्च के तीसरे सप्ताह में होगी।
विद्यालय प्रबंधन समिति की आम सभा आवश्यकता पड़ने पर अपनी बैठक बुलाने का निर्णय ले सकती है। हर वर्ष मार्च महीने में सामाजिक लेखा परीक्षा आयोजित की जाएगी। आम सभा की बैठकों में विद्यालय में पढ़ रहे बच्चों के माता-पिता, संरक्षक, ग्राम पंचायत/नगरपालिका, स्थानीय गणमान्य व्यक्ति, शिक्षाविद् को आवश्यक रूप से शामिल किया जाना जरूरी है। विद्यालय का कार्य सुचारू रूप से चलाने के लिए एक कार्यकारिणी समिति होगी।
इसमें से न्यूनतम तीन चौथाई सदस्य माता-पिता या संरक्षकों में से होंगे और बाकी सदस्य पदेन/मनोनीत व्यक्ति होंगे। कार्यकारिणी के सदस्यों में 50 प्रतिशत महिलाएं अवश्य शामिल होंगी।
समिति में पूर्व चयनित प्रधान और उप प्रधान को किसी भी दशा में अगले दो वर्षों के लिए समिति में दोबारा प्रधान/उपप्रधान नहीं बनाया जा सकता लेकिन उन्हें समिति में सदस्य के रूप में शामिल किया जा सकता है।
विद्यालय प्रबंधन समिति में दो विशेष आमंत्रित सदस्यों को मनोनीत किया जाना अनिवार्य है। यह सदस्य समिति के सलाहकार के रूप में कार्य करेंगे। इन सदस्यों को निर्णय/वोट देने का अधिकार नहीं होगा। समिति की बैठकों में कोरम पूरा करने या अन्य किसी भी रूप में इन सदस्यों की गणना नहीं होगी।
ग्राम पंचायत व नगरपालिका अपने निर्वाचित सदस्यों में से एक सदस्य को एसएमसी के लिए मनोनीत करेगी। सभी सदस्यों को शपथ दिलवाकर शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाए जाएंगे।
किसी भी दशा में स्कूल स्टाफ जैसे मिड डे मील वर्कर, एजुसेट चौकीदार, माली, चपरासी, स्वीपर, आंगनबाड़ी वर्कर को स्कूल प्रबंधन समिति का सदस्य नहीं बनाया जा सकता।