जींद। धमतान साहिब गांव के एक व्यक्ति को बीमा कंपनी ने मौत के बाद 10 लाख रुपये का बीमा देने से मना कर दिया। इसमें बीमा कंपनी के प्रतिनिधि ने हिसार के चुड़ामणि अस्पताल से फर्जी ओपीडी स्लिप लगाकर बीमा कंपनी ने मृतक की पत्नी को गुमराह किया और क्लेम राशि देने से मना कर दिया।
धमतान साहिब गांव निवासी महेंद्र की गिरने से हुए हृदयघात से 14 अगस्त 2021 को मौत हो गई थी। महेंद्र ने जून माह में ही दस लाख रुपये की बीमा पोलिसी एलआईसी से ली थी। पति की मौत के बाद बीमा राशि लेने के लिए उसकी पत्नी कविता ने एलआईसी से संपर्क कर सभी दस्तावेज जमा करवाए। कंपनी के सर्वेयर ने कविता के घर पहुंचकर नाबालिग बेटे पम्मी से कोरे कागजात पर हस्ताक्षर करवा लिए। इसके बाद निजी अस्पताल हिसार में टोहाना निवासी 40 वर्षीय महेंद्र सिंह की फर्जी ओपीडी पर्ची व कोरे कागजात के साथ लगाकर मृतक की पत्नी की ओर से दाखिल किया गया क्लेम रद्द कर दिया। इसके बाद मृतक की पत्नी ने एलआईसी के जोनल मैनेजर नई दिल्ली व बीमा लोकपाल चंडीगढ़ के पास वर्ष 2022 व 2023 में बीमा कंपनी की शिकायत भेजते हुए। नाजायज तौर पर रद्द किए गए बीमा क्लेम की मांग की। इसके बाद बीमा लोकपाल से भी जब न्याय नहीं मिला। इसके बाद मृतक की पत्नी कविता ने वर्ष 2024 में बीमा कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग जींद में शिकायत दर्ज करवाकर न्याय की मांग की। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एके सरदाना व सदस्य गुरुदत्त गोयल की बैंच ने मामले की सुनवाई करते हुए। भारतीय जीवन बीमा निगम को नोटिस देकर अदालत में अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया। इसमें दोनों पक्षों ने अपने साक्ष्य पेश किए। मृतक की पत्नी ने बीमा कंपनी के माध्यम से पेश की गई ओपीडी की पर्ची को अदालत में झूठा साबित किया, क्योंकि मृतक की उम्र 36 साल थी। इसकी वजह से बीमा कंपनी ने इस पर्ची व मृतक के नाबालिग बेटे पम्मी के लिए लिखित बयान जिसमें कंपनी के सर्वेयर ने अपनी मर्जी से लिखा था कि उसके पिता पिछले तीन चार साल से हृदय रोग की दवाइयां ले रहे थे। इसी को आधार बनाकर बीमा कंपनी ने क्लेम को रद्द कर दिया था। इस मामले में मृतक महेंद्र की पत्नी ने अदालत से 10 लाख रुपये 18 प्रतिशत ब्याज के साथ 25 अक्तूबर 2021 से मांगे थे। कंपनी को नाजायज तौर पर क्लेम रद्द करने पर एक लाख रुपये जुर्माना व 50 हजार रुपये कानूनी खर्च के लिए मुआवजा मांगा था। उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष एके सरदाना की बैंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कपंनी को दोषी को करार दिया और पीड़ित महिला को 10 लाख रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ 5 अप्रैल 2022 से अब तक देने के निर्देश दिए। 50 हजार रुपये नाजायज तौर पर बीमा क्लेम नहीं देने व 50 हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना व 21 हजार रुपये कानूनी खर्च देने के आदेश दिए हैं। यह राशि 45 दिन तक नहीं देने पर 12 प्रतिशत ब्याज के साथ देनी होगी।