जींद। गोहाना रोड निवासी लीना ने घर को आयुर्वेदिक बगिया में बदलकर एक उदाहरण पेश किया है। घर में 100 से अधिक चिकित्सीय पौधे लगे हैं। इनमें 20 से 30 प्रकार के सुंदर फूलदार औषधीय पौधे भी शामिल हैं।
तुलसी, एलोवेरा, गिलोय, अश्वगंधा, पुदीना, लेमनग्रास, ब्राह्मी, शंखपुष्पी, अडूसा, नीम, अजवाइन, हरसिंगार, गुड़हल, कनेर, अपराजिता, चमेली, रजनीगंधा, गुलाब, गेंदा, बेलपत्र और सदाबहार आदि पौधे न केवल घर की शोभा बढ़ाते हैं बल्कि सेहत दुरुस्त रखने के भी काम आते हैं। घर हरियाली और प्राकृतिक सुगंध से भर गया है। इससे परिवार के सदस्यों को मानसिक शांति और ताजगी का अनुभव होता है।
लीना को पौधों से इतना लगाव है कि वह उनकी देखभाल स्वयं करती हैं। पानी देना, निराई-गुड़ाई, छंटाई करना और समय-समय पर जैविक खाद डालना दिनचर्या का हिस्सा है। घर के कामकाज से होने वाली थकावट को भी वह अपनी बगिया में काम करके दूर करती हैं। उनका कहना है कि पौधों के बीच समय बिताने से मन शांत रहता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
हाल ही में महिला दोस्तों के व्हाट्सएप ग्रुप पर आयोजित ऑनलाइन गार्डन प्रतियोगिता में उनकी बगिया को द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ। इससे उनका उत्साह और बढ़ गया। वह जब भी किसी दूसरे शहर या प्रदेश में जाती हैं तो वहां से नए फूलदार या औषधीय पौधे अपनी बगिया में शामिल करती हैं।
लीना का मानना है कि यदि हर घर में कुछ चिकित्सीय पौधे लगाए जाएं तो परिवार स्वस्थ रह सकता है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। लीना की आयुर्वेदिक बगिया न केवल हरियाली का संदेश दे रही है बल्कि समाज में प्रकृति के प्रति जागरूकता फैलाने का काम भी कर रही है।
कई सहेलियां भी हुईं प्रेरित
लीना की इस पहल से प्रेरित होकर उनकी कई महिला मित्रों ने भी अपने घरों में औषधीय पौधे लगाने शुरू कर दिए हैं। वह सर्दी-खांसी, पाचन समस्या, सिरदर्द या छोटी-मोटी तकलीफों में इन पौधों का घरेलू उपचार के रूप में उपयोग करती हैं और दूसरों को भी प्राकृतिक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करती हैं।