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Jind News: लजवाना कलां गांव अपने अंदर एक इतिहास संजोए हुए

Wed, 13 Aug 2025 12:45 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, जींद
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12जेएनडी12: लजवाना कला गांव की चौपाल। संवाद - फोटो : संवाद
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जुलाना। लजवाना कलां गांव अपने अंदर एक इतिहास संजोए हुए है। ग्रामीण इस कदर तक आजादी के दिवाने थे कि 1856 में जींद के राजा के साथ लड़ाई शुरू कर दी। बाद में दो और रियासतों की सेना से भी छह माह तक लड़ाई लड़ी। इसके बाद अंग्रेजी सेना ने गांव को तोड़ दिया और अलग-अलग आठ गांव बसा दिए थे।
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तीन रियासतों की सेना भी एक गांव के ग्रामीणों को हरा नहीं पाई तो अंग्रेजों ने अपनी सेना को भेजकर गांव को तोड़ दिया। इसके बाद आठ गांव बस गए। गांव के दो लोगों ने आजाद हिंद फौज में भाग लेकर स्वतंत्रता संग्राम में अहम योगदान दिया।
ग्रामीणों ने जाट आरक्षण आंदोलन और कृषि कानूनों के विरोध में हुए किसान आंदोलन में भी बढ़चढ़ कर भाग लिया। गांव में 1856 में हुए ग्रामीणों और तीन रियासतों के बीच हुई लड़ाई की गवाह खूनी चौपाल आज भी मौजूद है लेकिन चौपाल का नवीनीकरण करवाया गया है। आज भी काफी चौड़ी दीवारें मौजूद हैं।
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पहले उस गांव में दलाल गोत के जाट बसते थे। उस समय गांव की आबादी पांच हजार के लगभग थी। उस समय गांव में 13 नंबरदार थे जिनमें भूरा और निंगाहियां दो नंबरदार मुख्य थे लेकिन किसी बात को लेकर दोनाें की अनबन रहती थी।
उस समय जींद के राजा ने जमीन की नई चकबंदी की जा रही थी। उनका एक तहसीलदार बड़ा रौबीला था। उससे जींद का सारा इलाका थर्राता था। तहसीलदार कंडेला गांव में लगान वसूलने के लिए गया हुआ था तो तहसीलदार वहां पर किसी ने ताना मारा कि दम है तो लजवाना कलां में जाकर दिखाओ। तहसीलदार ने इसे अपना अपमान समझा और लजवाना की ओर कूच कर दिया।
घटना की सूचना मिलते ही जींद के राजा ने गांव को तोड़ने के आदेश दिए। राजा की सेना से टक्कर लेने के लिए ग्रामीणाें ने भी सभी पुख्ता इंतजाम कर लिए थे। महिलाओं और बच्चों को रिश्तेदारियों में भेज दिया गया और बुजुर्गाें की सलाह से गांव में मोर्चे-बंदी कायम की गई। वट-वृक्षों के साथ लोहे के कढ़ाए बांध दिए गए।
इससे उन कढ़ाओं में बैठकर तोपची अपना बचाव कर सकें और राजा की फौज को नजदीक न आने दें। राजा और लजवाना गांव की लड़ाई छह माह तक चली लेकिन राजा की सेना नहीं जीत पाई तो नाभा और पटियाला रियासत के राजाओं से सहायता मांगी। वो भी कामयाब नही हो पाए तो ब्रिटिश सरकार से मदद ली गई। ब्रिटिश सरकार के दबाव में ग्रामीणों को गांव छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। गांव को तोड़ने के बाद ग्रामीणों ने आस पास सात गांव बसा लिए।
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