कंडेला खाप के लोगों को कठोर निर्णय लेने के लिए जाना जाता है। 28 जनवरी शाम को जब राकेश टिकैत की आंखों में कंडेला खाप के लोगों ने आंसू देखे तो रात को ही जींद-चंडीगढ़ नेशनल हाईवे पर जाम लगा दिया था। इसी प्रकार 2002 में बिजली बिलों के विरोध में किसान आंदोलन में भी कंडेला खाप ने पूरा आंदोलन अपने गांव पर ही केंद्रीत कर लिया था। यहां नौ किसानों की मौत हुई थी। इसके बाद ग्रामीणों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के गांव में घुसने पर पाबंदी लगा दी थी। अब इंटरनेट बहाली को लेकर भी सोमवार रात को कंडेला गांव के लोगों ने जाम लगा दिया था।
राकेश टिकैत आज रोहतक के किसानों में भरेंगे जोश
कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली सीमाओं पर चल रहे किसान आंदोलन को गति देने भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत तीन फरवरी को खरावड़ आ रहे हैं। यहां वे किसानों में जोश भरने का काम करेंगे। उनके रोहतक आगमन पर किसानों की ओर से पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया जाएगा। यह फैसला मंगलवार को खरावड़ में किसानों के लिए लगाए गए शिविर पर खरावड़ के ग्रामीणों ने लिया।
लंगर के संचालक यशवंत मलिक ने शिविर में सेवारत ग्रामीणों की बैठक लेते हुए किसान नेता के स्वागत को लेकर चर्चा की। स्वागत में किसी तरह की कसर न रहे, इसके लिए किसानों को जिम्मेदारियां सौंपी गई। इसके तहत उनका पगड़ी पहनाकर स्वागत किया जाएगा। राकेश टिकैत यहां किसानों को संबोधित भी करेंगे। इसके लिए 24 बाई 24 फुट का मंच लगाया गया है। यहां 15 से 20 प्रबुद्धजनों के बैठने की व्यवस्था रहेगी। बुधवार सुबह 10 बजे रागिनी से कार्यक्रम का शुभारंभ होगा।
यही नहीं लंगर पर भी खास व्यंजन बनाए जाएंगे। यहां रोज की तरह एक नहीं, तीन तरह की सब्जियां बनाई जाएगी। इसमें आलू-मटर, दाल मखनी व मिक्स वेज शामिल है। मीठे में किसान नेता के लिए हलवा बनेगा। पूरी के साथ रोटियों की भी व्यवस्था रहेगी। इधर, मकड़ौली टोल पर किसानों का धरना मंगलवार को भी जारी रहा। यहां किसान धरने पर बैठे रहे। पुरुषों व महिलाओं के दल सुबह ही ट्रैक्टरों में सवार होकर धरना स्थल पर पहुंचने शुरू हो गए थे। यहां रागिनी कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से किसानों को मंत्रमुग्ध किया।