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गुरुद्वारा सिंह सभा में लगा कीर्तन दरबार, गुरु की महिमा का हुआ गुणगान

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कार्यक्रम में भाग लेतीं श्रद्धालु महिलाएं। संवाद - फोटो : Jind
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जींद। गुरुद्वारा सिंह सभा में रविवार को सुखमणी सेवा सोसायटी ने गुरु ग्रंथ साहिब के प्रकाश पर्व के मौके पर कीर्तन दरबार लगाया। इसमें अटूट लंगर भी चला, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने शिरकत की।
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गुरु घर के प्रवक्ता बलविंद्र सिंह के अनुसार कीर्तन दरबार के आरंभ में रागी भागी गुरुदित्त सिंह के जत्थे ने मनभावन गुुरुबाणी शब्दों द्वारा समा बांध दिया। मुख्य ग्रंथी ज्ञानी सतबीर सिंह ने अपने कथा प्रवचन में गुरु की महिमा का व्याख्यान करते हुए बताया कि सत्संग से जुड़कर गुरु के भजन व कीर्तन द्वारा प्रभु से मिलने का रास्ता आसान हो जाता है। उन्होंने बताया कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब में 13 भाषाओं, 31 रागों, छह गुरुओं, तीन संतों, 13 भक्तों व 11 भाटों की बाणी दर्ज है। इस ग्रंथ में राम शब्द का 2522 बार व हरी शब्द का 8345 बार वर्णन किया गया है, लेकिन प्रकाश एक है और यह हमारा साझा ग्रंथ है। लुधियाना से आए प्रसिद्ध रागी भाई बलप्रीत सिंह के जत्थे ने कार्यक्रम के अंत में गुरु की महत्ता के निरोल शब्दों द्वारा रसभरी गुरुबाणी गायन करके कीर्तन दरबार को चार चांद लगा दिए। कीर्तन दरबार के अंत में गुरु का अटूट लंगर भी बरताया गया। इस मौके पर हरबंस सिंह, दर्शन सिंह, सरदार सिंह, सतनाम सिंह, गुरुविंद्र सिंह, गुलशन कोचर, विक्की गुंबर, मनोज वधवा, गुरुबचन सिंह, मनोहरलाल, गुरुद्वारा प्रधान शोभा सिंह व कृपाल सिंह समेत अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।
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