जींद। माजरा खाप पंचायत ने किसान आंदोलन में किसानों को गोली मारने या आदेश देने वाले पुलिस कर्मियों व अधिकारियों को सम्मानित करने के फैसले को लेकर प्रदेश सरकार की आलोचना की है।
माजरा खाप पंचायत प्रधान गुरविंदर सिंह संधू ने सरकार से सवाल किया है कि क्या निहत्थे किसानों पर गोली चलवाना या चलाना बहादुरी का प्रतीक है। छह लोगों की आंखों की रोशनी चली गई, 430 के लगभग घायल हुए थे। सैकड़ों किसानों पर झूठे मुकद्दमे दर्ज किए गए थे और उन्हें जेल में डाला गया था। हाईकोर्ट ने भी सरकार के रास्ता रोकने को अनुचित बताया है। सरकार इन अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मान क्यों देना चाहती है।
माजरा खाप पंचायत के प्रेस प्रवक्ता समुद्र सिंह फोर ने बताया कि 28 जुलाई को खापों की एक महापंचायत दनौदा गांव में बिनैण खाप के चबूतरे होगी, जिसमें उत्तर भारत की सभी खापों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। महापंचायत में सामाजिक मुद्दों लिव इन रिलेशनशिप, लव मैरिज, लड़की की शादी उम्र 21 साल के बजाय 18 साल रखना, समलैंगिक कानून पर चर्चा की जाएगी। महापंचायत में सरकार के लिए गए कर्मचारियों व अधिकारियों को सम्मानित करने के फैसले को भी निरस्त करने की मांग की जाएगी।