सेल्फ स्टडी और अनुशासन का नतीजा
सरोज ने अपनी पढ़ाई के लिए किसी ट्यूशन या कोचिंग का सहारा नहीं लिया। स्कूल से लौटने के बाद वह रोजाना सात घंटे पढ़ाई करती थीं और फिर घर के कामों में मां का हाथ बंटाती थी। रात में एक से दो बजे तक पढ़ाई कर वह अपनी तैयारी को और मजबूत करती थीं। सरोज ने सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। पढ़ाई के लिए सरोज ने यूट्यूब का सहारा लिया जो बेटी की सफलता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
परिवार का गर्व, बहनों की प्रेरणा
सरोज की मां सुदेश ने बताया कि वह अपनी बेटी की मेहनत और लगन से बहुत खुश हैं। सरोज न केवल अपनी पढ़ाई में अव्वल रही, बल्कि अपनी छोटी बहनों को भी पढ़ाती थीं। परिवार की आर्थिक स्थिति के बावजूद सरोज ने कभी हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प से यह मुकाम हासिल किया।
ये भी पढ़ें: HBSE Result: हरियाणा बोर्ड में जींद ने किया टॉप, कैथल ने पाया दूसरा स्थान; सिरसा पांचवें से 17वें पर लुढ़का