डूमरखां खुर्द में डिलीवरी के लिए पहुंची महिला को सुविधा नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने पीएचसी पर ताला जड़ दिया। करीब एक घंटे के बाद पुलिस के आश्वासन के बाद ताला खुलवाया ग्रामीणों का कहना है कि गांव की ही गर्भवती महिला नेहा अपने परिजनों के साथ डूमरखां खुर्द गांव में पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) में पहुंची थी। यहां पर कोई भी डॉक्टर, नर्स मौजूद नहीं थे। काफी देर इंतजार करने के बाद गर्भवती महिला को उसके परिजन नरवाना नागरिक अस्पताल लेकर गए।
ग्रामीणों को इस बात का पता चला तो उन्होंने बुधवार सुबह पीएचसी पहुंच कर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ रोष प्रकट किया और गेट को बंद करके ताला जड़ दिया। नरवाना सदर थाना प्रभारी नरसिंह मौके पर पहुंचे। यहां काफी देर तक थाना प्रभारी के साथ ताला खोलने को लेकर ग्रामीणों की बहस भी हुई। ताला लगने की जानकारी पर पहुंचे विधायक के भतीजे कवलजीत के साथ भी ग्रामीणों की काफी बहस हुई।
साढ़े नौ बजे ग्रामीण ताला खोलने को तैयार हुए। ग्रामीणों द्वारा आठ बजे पीएचसी के मेन गेट पर ताला जड़ दिया था। ड्यूटी पर आने वाला स्टाफ भी ताला बंद होने के चलते बाहर खड़ा रहा।
लापरवाह है स्टाफ
ग्रामीण दलबीर, रोहताश, राजबीर, कृष्ण, हवा सिंह, टेकचंद, चांदी, सत्ता, मनजीत ने कहा कि मंगलवार देर शाम को गर्भवती महिला डिलीवरी के लिए परिजनों के साथ पहुंची। यहां पर कोई भी डॉक्टर, नर्स नहीं थी। महिला के साथ अगर कोई अनहोनी हो जाती तो इसका जिम्मेदार कौन होता। महिला के परिजन उसे नरवाना नागरिक अस्पताल में लेकर गए। इन लोगों का कहना है कि पीएचसी में अधिकांश पद भी रिक्त हैं। यहां पर आने वाले मरीजों को दवा भी पूरी नहीं मिलती।
केंद्रीय मंत्री के गांव के साथ लगते गांव की घटना
हैरानी की बात यह है कि पीएचसी पर इस प्रकार की घटना केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह और उनकी विधायक पत्नी प्रेमलता के गांव डूमरखा कलां के साथ लगते डूमरखां खुर्द में हुई है।
मांगी गई है लिखित शिकायत
सिविल सर्जन डॉ. दीपा जाखड़ के अनुसार मंगलवार देर शाम को सरपंच का फोन आया था कि कोई भी कर्मचारी नहीं है। सरपंच को दस मिनट के अंदर पहुंचने की बात कही थी। लिखित में शिकायत मांगी गई है। लिखित में शिकायत पंचायत देती है तो कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर कार्रवाई की जाएगी।