नागरिक अस्पताल में एक बार फिर एंबुलेंस सेवा की पोल खुल गई। एंबुलेंस के इंतजार में अस्पताल के गेट के बाहर एक युवती स्ट्रेचर पर करीब एक घंटे तड़पती रही। काफी समय तक एंबुलेंस नहीं आने के बाद तबीयत बिगड़ती देख परिजन युवती को ऑटो में ही निजी अस्पताल में ले गए। परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर मामले को गंभीरता से नहीं लेते हुए मरीज को रेफर कर पल्ला झाड़ने का आरोप लगाया। एक माह के दौरान इस तरह की यह तीसरी घटना है।
लोको कॉलोनी निवासी राजीव की 19 वर्षीय बेटी नेहा को तेज बुखार होने पर नागरिक अस्पताल भर्ती करवाया गया। तेज बुखार के चलते गंभीर अवस्था को देखते हुए चिकित्सकों ने युवती को ग्लूकोज लगाकर रोहतक रेफर कर दिया। बेसुध हालत में युवती को परिजन रोहतक पीजीआई ले जाने के लिए स्ट्रेचर पर लेटाकर अस्पताल के गेट पर ले आए।
यहां लगभग एक घंटे तक वे एंबुलेंस का इंतजार करते रहे। अभिभावक राजीव ने बताया कि उन्होंने बार-बार एंबुलेंस कंट्रोल रूम से एंबुलेंस उपलब्ध करवाने का आग्रह किया। कंट्रोल रूम के कर्मचारियों ने एंबुलेंस रोहतक जाने की बात कही गई। एक घंटे बाद भी एंबुलेंस नहीं आई और युवती की तबीयत ज्यादा बिगड़ गई, तो वहां मौजूद लोगों की मदद से बाहर से ऑटो बुलाई गई। परिजन युवती को ऑटो से निजी अस्पताल में ले गए, जहां से उसे निजी अस्पताल की एंबुलेंस से पीजीआई रोहतक ले जाया गया।
फोन पर जज से किया था दुर्व्यवहार
एक माह के अंदर ही यह तीसरी घटना है। कुछ दिनों पहले रामराये गांव के पास दुघर्टना में घायल व्यक्तियों को एंबुलेंस नहीं पहुंचने पर सीबीआई के जज जगदीप सिंह नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उस दौरान एंबुलेंस के लिए फोन करने पर कंट्रोल रूम में बैठे कर्मचारी द्वारा जज से अभद्र व्यवहार करते हुए एंबुलेंस को उड़कर आने की बात कही गई। करीब सप्ताह पहले भी भंभेवा में दुर्घटना में बुरी तरह से घायल हुए व्यक्ति को नागरिक अस्पताल के चिकित्सकों द्वारा पीजीआई रेफर किया गया, लेकिन एंबुलेंस नहीं आने के कारण मरीज को काफी देर इंतजार करना पड़ा।
होगी सख्त कार्रवाई
यह गंभीर मामला है। इसकी जांच की जाएगी और जो दोषी होगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। एंबुलेंस सेवा के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डॉ. राजेश भोला, नोडल अधिकारी, एंबुलेंस कंट्रोल रूम