फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जींद की प्रसिद्ध मुर्राह भैंसों का कारोबार ठप

Tue, 22 Nov 2016 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, जींद
विज्ञापन
पीएनबी की बंद एटीएम । - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन
दो सप्ताह से जारी करेंसी संकट का अंत होता नजर नहीं आ रहा है। बैंकों के बाहर अब भी लोगों की लाइन छोटी नहीं हो रही हैं। वहीं एटीएम खाली रहने से लोगों को और भी अधिक परेशानी हो रही है। नोटबंदी से जींद का प्रसिद्ध मुर्राह नस्ल की भैंसों का कारोबार ठप हो गया है। कैश नहीं होने के कारण न तो व्यापारियों को गांवों से भैंस मिल रही हैं और न ही बाहर के व्यापारी भैंस खरीदने आ रहे हैं।
विज्ञापन

  सोमवार को लोगों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अधिकतर एटीएम खाली रहे।

इससे लोग कैश के लिए एटीएम बूथों की ओर भागते रहे। दोपहर बाद कुछ एटीएम में कैश आने से कुछ राहत मिली। वहीं बैंकों के पास नकदी का संकट होने से सरकार द्वारा जारी की गई हिदायतों के अनुसार भी कैश नहीं मिल पाया। कई बैंकों ने प्रति उपभोक्ता 10 हजार रुपये कैश दिया तो कुछ जगह चार से छह हजार रुपये ही मिले, जबकि सरकार ने खाते से 24 हजार रुपये निकालने के निर्देश दिए हैं।

100 से अधिक भैंसों का होता था व्यापार
नोट बंदी से पहले जींद से करीब एक सौ भैंसों का कारोबार प्रतिदिन होता था। इसमें 60-70 भैंस प्रतिदिन मुंबई, हैदराबाद, पुणे व बेंगलुरु भेजी जाती थी। वहीं इतनी ही भैंस ग्रामीण क्षेत्र से जींद और बाहर के व्यापारी खरीदते थे। पशु व्यापारियों को भैंस बाहर ले जाने के लिए 60 हजार से सवा लाख रुपये तक ट्रक का भाड़ा देना पड़ता है। इसके लिए भी पैसे का इंतजाम नहीं हो रहा है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र से भी व्यापारी भैंस नहीं खरीद पा रहे हैं।
विज्ञापन


पशु व्यापारी रविंद्र के अनुसार मुंबई के लिए प्रति गाड़ी करीब 60 हजार रुपये और कर्नाटक के लिए एक से सवा लाख रुपये तक भाड़ा बनता है। बैंकों से कैश निकालने की सीमा तय होने के कारण किसानों को पशुओं की कीमत का भुगतान भी नहीं हो पा  रहा है।

नहीं हो रही कैश की पूर्ति
कैश की कमी बनी हुई है। सोमवार को करीब तीन करोड़ रुपये आए हैं। इससे काम नहीं कर रहा है। सोमवार को 500 रुपये के नए नोट आए हैं। कुछ एटीएम में डाले गए हैं, लेकिन अभी कैश की पूर्ति सामान्य नहीं हुई है। - मिथिलेश कुमार झा, एलडीएम

बैंकों में खुलते ही लगी लाइनें
 उचाना (ब्यूरो)। बैंकों में सोमवार को करेंसी जमा करवाने, चेंज करवाने वालों की लाइनें लग गई। रेलवे रोड पर पीएनबी बैंक में पहुंचे लोगों ने करेंसी नहीं होने पर रोष प्रकट किया। सुबह जमा करवाने आए लोगों की करेंसी चेंज की गई। लोगों ने कहा कि बैंक कर्मचारी बैंक में नगदी नहीं होने की बात कह रहे है। दो दिनों से वो बैंक आ रहे है लेकिन करेंसी चेंज नहीं हुई है। सुरेश, नरेश, अमन ने कहा कि नोट बंदी के बाद निरंतर चेंज करवाने के लिए परेशानी हो रही है। बैंकों, एटीएम में कैश नहीं मिलता है। जो कैश आता है वह डिमांड के हिसाब से कम होता है। पुराने नोटों पर सामान नहंी मिलता। जो नए नोट मिलते है उससे जो खर्च हर महीने होता है उसके लेकर राशि नहीं मिल रही है।

देरी से पहुंचा कैश, लोग परेशान, जताया रोष

सफीदों (ब्यूरो)। क्षेत्र के कई बैंकों में कैश देरी से पहुंचने के कारण उपभोक्ताओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक्सिस बैंक में दोपहर तक भी पैसे नहीं पहुंचने से उपभोक्ताओं ने रोष प्रकट किया। उपभोक्ताओं के अनुसार बैक कर्मी उन्हें पूरा दिन बैंक के बाहर बैठाने के बाद सांय को पैसे नहीं आने या कैश खत्म होने की बात कहकर वापस भेज देते हैं। इन लोगों ने कहा कि वे एक्सिस बैंक के ग्राहक हैं और उन्हें चक्कर कटवाए जा रहे हैं।

इन लोगों ने कहा कि 16 नवंबर के भरे चेक लिए हुए हैं, जिस पर बैंक कर्मियों ने 300 नंबर से अधिक का टोकन नंबर देकर पूरा दिन बैक के बाहर बैठने के लिए मजबूर किया है। वे पिछले पांच दिनों से बैंक के चक्कर लगा रहे हैं। वहीं एक्सिस बैंक के प्रबंधक तरुण का कहना है कि सरकार द्वारा कैश देरी से भेजे जाने के कारण यह परेशानी हो रही है। सोमवार को शाम करीब तीन बजे कैश मिला है। इससे कुछ उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है।

पीएनबी में रही अफरा-तफरी
 सफीदों शहर के महात्मा गांधी रोड पर स्थित पंजाब नेशनल बैक में भी कैश देरी से पहुंचने के कारण बैक में अफरा-तफरी मच गई। सरकार द्वारा कैश कम भेजे जाने के कारण अधिकतर उपभोक्ताओं को बिना पैसे लिए ही वापस घर जाना पड़ा। बैंक प्रबंधक प्रदीप शर्मा ने कहा उन्होंने उपभोक्ताओं की अधिक संख्या देखते हुए दो करोड़ रुपये की डिमांड भेजी थी, लेकिन सरकार ने सिर्फ 15 लाख रुपये ही भेजे हैं। यह कैश भी दोपहर साढ़े 12 बजे पहुंचा है।

परेशानी है, फिर भी फैसले से खुश
पिल्लूखेड़ा की अनाज मंडी में चाय की दुकान चलाने वाले अरविंद ने कहा कि नोटबंदी के बाद से खुल्ले रुपयों को लेकर थोड़ी परेशानी होती है, लेकिन इससे चाय की बिक्री पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। यदि किसी के पास खुल्ले रुपये नहीं होते तो वह उसे चाय पिलाने से मना नहीं करता, बल्कि उसे चाय पिलाकर बाद में रुपये दे जाने के लिए कह देता है। अरविंद ने कहा कि पीएम मोदी के कदम से उसे कोई दिक्कत नहीं है। बल्कि वह पीएम मोदी के फैसले के साथ हैं।
विज्ञापन



 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें