पिछले दो महीने से डिडवाड़ा गांव की नजूल लैंड के मामले में आंदोलन कर रहे लोगों ने अनशन शुरू कर दिया है। पिछले 10 दिन से अनशन कर रही दो महिलाओं शकुंतला और कृष्णा की तबीयत सोमवार को फिर से बिगड़ गई। इसके बाद आंदोलन कर रहे अन्य लोगों ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया। यहां लोगों ने कहा कि अस्पताल में आने के बाद भी महिलाओं की देखभाल नहीं हुई। काफी देर के बाद महिलाओं का इलाज शुरू हुआ।
गौरतलब है कि डिडवाड़ा गांव की हरिजन सोसायटी के लोगों ने नजूल लैंड को बेचने में भारी गड़बड़झाले का आरोप लगाया है। इन लोगों का कहना है कि एक भाजपा नेता और डीसी ऑफिस के कुछ कर्मचारियों ने मिलीभगत कर जमीन को हड़पा है। आरोप है कि नजूल लैंड के तहत अनुसूचित जाति के लोगों को दी गई, जमीन को बेचा नहीं जा सकता। इसके लिए सहकारी समिति के रजिस्ट्रार की अनुमति लेनी होती है। आरोप है कि इसमें कानून का उल्लंघन हुआ है।
लाखों रुपये के टैक्स चोरी का आरोप
आंदोलन कर रहे लोगों का आरोप है कि इस जमीन को बेचने में सरकार को भी लाखों रुपये की टैक्स चोरी हुई है। अधिकारियों ने इसमें भी मिलीभगत की है। इस मामले में एक दिन पहले ही एक व्यक्ति ने राष्ट्रपति को पत्र भेज कर इच्छा मृत्यु की मांग की थी।
नहीं हुई देखभाल
महिलाओं की तबीयत बिगड़ते ही तुरंत 102 नंबर पर फोन किया। एंबुलेंस आई और महिलाओं को अस्पताल ले गई। इसके बाद यहां कोई देखभाल नहीं हुई। मीडिया को फोन करने के बाद ड्यूटी पर तैनात चिकित्सक ने मीडिया से बात नहीं करने की भी धमकी दी। मीडिया फोन करने के बाद ही महिलाओं की देखरेख हुई है। -सूबे सिंह, आंदोलनकारी
होगी जांच
आपात काल में आने वाले मरीज को प्राथमिकता के आधार पर इलाज देना होता है। यदि चिकित्सक ने कोई लापरवाही की है तो, इसकी जांच की जाएगी। -डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन