केंद्र में आरक्षण की मांग के लिए आंदोलनरत जाट समुदाय के लोगों ने शनिवार दोपहर तीन बजे नरवाना में दिल्ली-फिरोजपुर रेलवे ट्रैक जाम कर दिया।
आंदोलन की चेतावनी के चलते शनिवार दोपहर तक ट्रेन तो चलती रही लेकिन प्रशासन की सांसें अटकी रही। शनिवार शाम सात बजे जाटों ने सरकार को पांच मार्च तक मांगों का अल्टीमेटम देते हुए ट्रैक खोल दिया। इससे पहले दोपहर बाद जाम के कारण फिरोजपुर जा रही इंटरसिटी एक्सप्रेस को गांव घासो के रेलवे स्टेशन पर ही रोकना पड़ा।
शनिवार दोपहर तक सभी ट्रेनें सुचारु चलीं लेकिन दोपहर बाद जाट ट्रैक पर डट गए। केंद्र की नौकरियों में आरक्षण की मांग को पूरा करवाने के लिए सर्व जाट खाप महापंचायत के फैसले के अनुसार शनिवार को रेलवे ट्रैक जाम करना था। इसका फैसला 23 फरवरी को जाट चौधरियों ने गांव दनौदा के एतिहासिक चबूतरे पर लिया था। शुक्रवार शाम भिवानी में जाट आरक्षण समिति के प्रांतीय प्रधान हवासिंह सांगवान की ओर से कार्यक्रम को चार मार्च तक स्थगित करने के बयान के बाद मामला कुछ ठंडा पड़ गया था।
उधर, शनिवार को नरवाना में मौसम खराब होने के कारण लोग देरी से पहुंचे। शनिवार को अनेक जाट बिरादरी के प्रतिनिधि रेलवे ट्रैक पर पहुंचे और ट्रैक के पास बैठ गए। दोपहर तक तो ट्रेनें गुजरने दी गईं लेकिन बाद में आंदोलन शुरू करने का ऐलान कर दिया गया। प्रशासन ने कानून व्यवस्था को बरकरार रखने के लिए काफी पुलिस बल नरवाना में तैनात किया हुआ था।
शनिवार सुबह जाट बिरादरी के लोग पीडल्यूडी विश्राम गृह में इकट्ठे हुए और काफी मंथन के बाद ट्रैक पर पहुंचे। काफी जद्दोजहद के बाद जाट नेताओं को सलाह-मशवरे के लिए गांव मैय्यड़ भेजा गया था। इससे पूर्व वहां से कोई संदेश आता नरवाना में डटे लोग रेलवे ट्रैक पर आ धमके और ट्रैक को बाधित कर दिया। जाट आरक्षण समिति की युवा शाखा के प्रांतीय प्रधान ईश्वर सिंह ने बताया कि रेलवे ट्रैक को जाम रखने का फैसला उनका अंतिम है और जब तक जाटों को आरक्षण नहीं मिलता, वे ट्रैक पर बैठे रहेंगे लेकिन शनिवार शाम सात बजे आंदोलन पांच दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
जाट पिछले 8 वर्षों से आरक्षण के लिए संघर्ष कर रहे हैं लेकिन उनकी मांग को केंद्र सरकार ने गंभीरता से नहीं लिया। नरवाना रेलवे स्टेशन मास्टर एसएन गुप्ता ने बताया कि दिल्ली से आने वाली फिरोजपुर-इंटरसिटी को गांव घासो के रेलवे स्टेशन पर रोक दिया गया है।
फिर विफल दिखा प्रशासन
उचाना में हुए किसान आंदोलन के बाद एक बार फिर जिला प्रशासन आंदोलन को टालने में विफल दिखा। शनिवार सुबह से ही जाट नेता किसी प्रशासनिक अधिकारी या राजनेता का इंतजार करते रहे और दोपहर बाद ट्रैक पर आ डटे। आरक्षण के मुद्दे पर जाट बिरादरी के लोग शनिवार को सर्व जाट खाप पंचायत के प्रांतीय प्रधान नफेसिंह नैन की अध्यक्षता में एकजुट हुए।
जाट आरक्षण समिति की युवा शाखा के प्रधान ईश्वर सिंह नैन ने कहा कि जाट नेता शनिवार सुबह से सरकार के किसी नुमाइंदे की इंतजार में ट्रैक के निकट बैठे थे लेकिन कोई नहीं आया। अब जब तक आरक्षण नहीं मिल जाता तब तक वे चैन से नहीं बैठेंगे और अगर सरकार ने कोई संज्ञान नहीं लिया तो प्रदेश के दूसरे ट्रैक भी जाम करेंगे। सात मार्च के बाद किसी भी समय आचार संहिता लग सकती है।
इसके बाद जाटों को 8 वर्ष का संघर्ष बेकार चला जाएगा। सरकार को तुरंत मंत्रिमंडल की बैठक बुलाकर आरक्षण का रास्ता प्रशस्त कर देना चाहिए। अगर आरक्षण नहीं मिला तो नेताओं को गांव में नहीं घुसने दिया जाएगा।
मैय्यड़ में हिसार-जयपुर ट्रेन रोकी, एक घंटे ट्रैक जाम
हांसी (हिसार)। केंद्र में ओबीसी कोटे में शामिल किए जाने की मांग के लिए जाटों ने शनिवार को गांव रामायण और मैय्यड़ स्थित रेलवे फाटक के पास अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। आंदोलन कर रहे जाटों ने हिसार-जयपुर रेलगाड़ी को रोका, जिसे आधे घंटे बाद जाने दिया गया।
इसी दौरान एक आंदोलनकारी राजकुमार ने अचानक रेल के आगे लेटकर जान देने की कोशिश की लेकिन मौके पर मौजूद अन्य लोगों ने उसे बचा लिया। धरने के पहले दिन आंदोलनकारियों ने एक घंटे तक रेलवे ट्रैक पर सांकेतिक जाम लगाया, जिसके चलते एक मालगाड़ी काफी देर तक ट्रैक पर ही खड़ी रही। उधर, अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने कहा कि उनका धरना आरक्षण नहीं मिलने तक जारी रहेगा।
मलिक ने कहा कि सरकार से बातचीत के तमाम विकल्प खुले हैं और समिति के प्रदेशाध्यक्ष धर्मपाल धारीवाल की अगुवाई में पांच सदस्यीय कमेटी को नरवाना यूनिट से तालमेल कर बातचीत के लिए भेजा गया है। जाट समुदाय के लोगों ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के मुताबिक शनिवार को रामायण रेलवे ट्रैक के पास तंबू गाड़ दिए। यशपाल मलिक की अध्यक्षता में धरने पर बैठे जाट नेताओं ने सरकार को जमकर कोसा।
उन्होंने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि जाट अब गुमराह नहीं होंगे और हर हाल में अपना हक लेकर रहेंगे। केंद्र सरकार में नौकरियों के लिए आरक्षित कोटे में शामिल किए जाने की मांग कर रहे आंदोलनकारियों ने कहा कि ये उनका अंतिम आंदोलन होगा।
‘अभी नहीं तो कभी नहीं’ का नारा देते हुए संघर्ष समिति के नेता महेंद्र पूनिया ने कहा कि जाट समुदाय आरक्षण के लिए अपनी अंतिम लड़ाई लड़ने के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद उन्हें आरक्षण मिलने की गुंजाइश नहीं के बराबर रहेगी। इस दौरान मैय्यड़ के सरपंच दीपा, राजेश सुल्तानपुर, धारा सिंह, कपूरा देपल, जोगेंद्र सिंह, नफे सिंह व कई मौजूद थे।
मध्यस्थता के लिए घूमते रहे सरकार के नुमाइंदे
धरने के दौरान कई नेता सरकार और आंदोलनकारियों के बीच मध्यस्थता के लिए घूमते रहे। धर्मवीर गोयत समेत कई अन्य नेता दोपहर से ही आंदोलनकारियों से संपर्क साधे हुए थे।
हालांकि कोई नतीजा नहीं निकल सका है लेकिन सरकार में पैठ का वास्ता देकर जाट नेताओं के बीच आए राजनीतिक लोग पूरे सक्रिय दिखाई दिए।
खाने-पीने का किया बंदोबस्त
आंदोलन के दौरान धरने में शामिल होने वाले लोगों के लिए खाने पीने की व्यवस्था मैय्यड़ के सरपंच ने की है। इसके साथ अलग-अलग गांवों के मौजिज लोगों को हर रोज ट्रैक्टर ट्रालियों में लोगों को भरकर लाने की हिदायत दी गई है।
हो सकता था बड़ा हादसा
धरने के दौरान शाम तीन बजे हिसार-जयपुर रेल रामायण रेलवे ट्रैक के नजदीक पहुंचने ही वाली थी कि अचानक धरने पर बैठे कुछ लोगों ने ट्रैक पर लोहे के गार्डर डाल दिए। इसी दौरान ट्रेन आ गई और गेटमैन ने हाथ में लाल झंडी लेकर ट्रेन की तरफ दौड़ लगा दी।
आधे किलोमीटर के फासले पर ट्रेन को रुकवा दिया गया। आधे घंटे तक रेल के रुकने के बाद रास्ता साफ किया गया और गेटमैन ने रेल को हरी झंडी दिखा दी। रेल दोबारा चल पड़ी लेकिन इसी दौरान एक आंदोलनकारी छान निवासी राजकुमार अचानक पटरी पर लेट गया और जान देने की कोशिश की। मौके की नजाकत भांपते हुए कुछ लोगों ने दौड़कर उसे उठाया।
पिछड़ा वर्ग ने भी दी ट्रैक जाम करने की चेतावनी
हिसार। रिपब्लिकन बैकवर्ड कांग्रेस ने जाट समुदाय की ओर से आरक्षण मुद्दे पर किए जा रहे ट्रैक जाम की कड़े शब्दों में निंदा की है। आरबीसी ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जाटों के दबाव में आकर पिछड़ा वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण के साथ छेड़छाड़ की तो वे लोग भी ट्रैक जाम कर देंगे।
फव्वारा चौक पर जारी धरने के 72वें दिन संबोधित करते हुए पार्टी के जिलाध्यक्ष रामनाथ धुवारिया ने कहा कि जाट समुदाय इससे पहले भी रेलवे ट्रैक जाम करके प्रदेश व केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर चुका हैं। मौके पर ओमप्रकाश वर्मा, मामनराम मलेठिया, लीलूराम बासनीवाल, रामस्वरूप दहमीवाल, मास्टर रामचंद्र जांगड़ा, मागेराम बगला, नरसिंह मुजाना, रणजीत सिंह आदमपुर, हरस्वरूप बरवाला, बनवारीलाल जांगड़ा, हुकुमचंद खांडोदिया उपस्थित थे।