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निजी कंपनी की नौकरी से घर चलाना हुआ मुश्किल तो अपनाई बागवानी

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13अपने बाग में मौजूद फरैन कलां निवासी किसान अजमेर मलिक। - फोटो : Jind
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जींद। नौकरी अगर अच्छी हो तो खेती-किसानी करने के बारे में भला कौन सोचता है। लेकिन फरैन कलां गांव के अजमेर मलिक ने अपनी नौकरी से ज्यादा किसानी में फायदा दिखा और छोड़ दी नौकरी। इसके बाद उन्होंने चार एकड़ जमीन में बाग और एक एकड़ में नेट हाउस लगाकर खीरा उगाकर अपनी आमदनी बढ़ाई। अजमेर का कहना है कि निजी कंपनी में नौकरी करने के दौरान घर चलाना मुश्किल हो गया था। इस दौरान खेती में बचत देखकर उन्होंने नौकरी छोड़ खेती को करियर के रूप में चुना।
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अजमेर मलिक ने बताया कि पहले वह अपने पांच एकड़ जमीन पर गेहूं और कपास सहित अन्य परंपरागत फसलों की खेती करता था। सालभर में खेती से उसे 50 हजार रुपये ही बचते थे। इसके बाद उसने चार एकड़ जमीन में बाग लगाया और एक एकड़ में खीरा उगाया। इसके बाद अजमेर मलिक ने नौकरी और परंपरागत खेती की ओर मुड़कर भी नहीं देखा। अजमेर मलिक ने कहा कि वह पिछले पांच साल से चार एकड़ में बाग लगा रहा है। वहीं एक एकड़ में नेट हाउस लगाया हुआ है। एक एकड़ से उसे दो से ढाई लाख रुपये की बचत हो रही है। वहीं एक एकड़ बाग पर केवल 40 हजार रुपये खर्च होता है, उसने फिलहाल चार एकड़ में अमरूद, आडू, नींबू व किन्नू के बाग लगाए हुए हैं।
एक मित्र ने दी थी बाग लगाने की सलाह
एक निजी कंपनी में काम करते हुए अजमेर मलिक को घर का खर्च निकाला मुश्किल हो गया था। इसके बाद अजमेर मलिक को एक मित्र ने बाग लगाने की सलाह दी। उसने बागवानी विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया तो उसे पता लगा कि बागवानी खेती शुरू करने पर सरकार की ओर से अनुदान भी दिया जा रहा है। पांच साल पहले उसने अपने पांच एकड़ में बाग लगाकर खेती शुरू कर दी। एक साल में जब उसे नौकरी से ज्यादा मुनाफा बागवानी में होने लगा तो उसने नौकरी छोड़कर अपना पूरा ध्यान बागवानी की ओर किया। अब उसे हर एकड़ से दो से ढाई लाख रुपये की बचत हो रही है।
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