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Hydrogen Train: देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन से जींद रचेगा इतिहास, 2500 यात्री लेकर 140 किमी स्पीड से दौड़ेगी

Sat, 03 Jan 2026 12:42 PM IST
शाहरुख खान प्रमोद राठी, संवाद न्यूज एजेंसी, जींद

सार

पिछले एक साल से हाइड्रोजन ट्रेन चलने का इंतजार अब लगभग पूरा होने वाला है। 20 जनवरी के बाद सोनीपत रेललाइन पर ट्रेन चलने की उम्मीदें परवान चढ़ गई हैं। हाइड्रोजन ट्रेन शुरू होने के साथ ही जींद का नाम राष्ट्रीय स्तर पर नई तकनीक अपनाने वाले शहरों में शुमार हो जाएगा।
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hydrogen train - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आखिर जींद पहुंच गई है। जींद से ही यह ट्रेन 20 जनवरी के बाद सोनीपत के लिए पहली बार रवाना होगी। ट्रेन व हाइड्रोजन प्लांट की टेस्टिंग के लिए लखनऊ से अनुसंधान और विकास संगठन (आरडीएसओ) की दो टीमें भी जींद पहुंच चुकी हैं। 
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यह टीमें प्लांट की मशीनों की टेस्टिंग कर रही हैं। इसके बाद ट्रेन के उपकरण व अन्य सामान की टेस्टिंग के बाद हरी झंडी देगी। यह ट्रेन पूरी तरह से भारत में डिजाइन और विकसित की गई है। ब्रॉड गेज लाइन पर चलने वाली यह दुनिया की सबसे लंबी (10 कोच) और सबसे शक्तिशाली (2400 किलोवाट) हाइड्रोजन ट्रेन है। 

यह एक बार में 2500 यात्रियों को ले जा सकती है। 360 किलो हाइड्रोजन से 180 किलोमीटर का सफर तय कर सकती है। यानी एक किलोमीटर की दूरी तय करने में दो किलो हाइड्रोजन खर्च होगी। दूसरी तरफ डीजल गाड़ी साढ़े चार लीटर में एक किलोमीटर चलती है। 
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इसकी अधिकतम स्पीड 140 किमी प्रति घंटा है। 1,200 हॉर्स पावर यह ट्रेन हाइड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक पर आधारित है। इस पर 82 करोड़ रुपये लागत आई है। 
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भारत हाइड्रोजन ट्रेन वाला आठवां देश
ट्रेन के कोच चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी में तैयार किए गए हैं। इसका परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, कनाडा, फ्रांस, स्वीडन के बाद हाड्रोजन ट्रेन वाला भारत आठवां देश बन गया है। ट्रेन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रियों को सुविधा, सुरक्षा व बेहतर सफर का नया अनुभव मिल सके। ट्रेन-सेट में दो ड्राइविंग पावर कार (डीपीसी) शामिल हैं। इनमें प्रत्येक की क्षमता 1200 किलोवाट व कुल मिलाकर 2400 किलोवाट शक्ति के साथ 8 यात्री कोच लगाए गए हैं।
 

मेट्रो की तर्ज पर बनी, कोई आवाज नहीं आएगी
  • ट्रेन के कोच मेट्रो की तर्ज पर खुलेंगे और बंद होंगे। पूरी तरह दरवाजे बंद होने के बाद ही ट्रेन स्टेशन छोड़ेगी।
  • बिना आवाज के चलेगी, यात्री आरामदायक सफर का अनुभव करेंगे।
  • सफर के दौरान पंखे, लाइट और एसी की सुविधा।
  • हर कोच में डिस्प्ले होगा। आने वाले स्टेशन के बारे में पहले ही सूचना मिल जाएगी।

पानी और भाप उत्सर्जित करता है इंजन
यह ट्रेन शून्य कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन करती है और इसका एकमात्र उत्सर्जन जल वाष्प है। ट्रेन चलने के दौरान केवल पानी और भाप उत्सर्जित करेगी। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल मॅल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन डाली जाएगी। ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी और इससे पैदा होने वाली बिजली लिथियम आयन बैटरी को चार्ज करेगी। इस दौरान धुएं की जगह सिर्फ भाप निकलेगी। ट्रेन से न सिर्फ प्रदूषण कम होगा बल्कि ईधन खर्च में भी कमी आएगी।
 

पायलटों को चेन्नई और जालंधर में दी गई ट्रेनिंग
हाइड्रोजन ट्रेन के संचालन के लिए मई-जून में जींद के तीन और दिल्ली के दो लोको पायलटों को चेन्नई में ट्रेनिंग दी गई थी। इसके बाद सितंबर-अक्तूबर में जींद के दो लोको पायलटों को जालंधर बुलाया और वहां एक महीने ट्रेनिंग दी। इस दौरान उन्हें हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीकी और संचालन से जुड़ी बारीकियों के बारे में बताया गया।

  • 140 किमी प्रति घंटा है अधिकतम स्पीड
  • 180 किमी का सफर तय करेगी 360 किलो हाइड्रोजन से

 

ट्रेन और रेलवे स्टेशन पहुंच गई है। अभी ट्रैक पर ट्रायल होगा, इसके बाद ट्रेन रवाना होगी। तारीख तय होनी बाकी है। -अजय माइकल, सीपीआरओ, नई दिल्ली
 
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2500 यात्री ले जा सकेगी एक बार में
अभी रेलवे की तरफ से ट्रेन संचालन और प्लांट के उद्घाटन को लेकर कोई तारीख निर्धारित नहीं हो सकी है। हमने अपनी तरफ से सभी तैयारियां पूरी कर तो हैं।- संजय, मैनेजर, हाइड्रोजन प्लांट, जींद।
 
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