जुलाना। गांव करसोला शिक्षा, खेल और सामाजिक गतिविधियों के साथ अपनी गौरवशाली सैनिक परंपरा को भी बनाए रखा है। गांव के कई युवा भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना में सेवा देकर देश की सुरक्षा में योगदान दे रहे हैं। यही कारण है कि करसोला को क्षेत्र में देशभक्ति और राष्ट्रसेवा की भावना से ओतप्रोत गांव के रूप में जाना जाता है।
महावीर चक्र विजेता फतेह सिंह लाठर की जन्मभूमि करसोला ने देश को समय-समय पर कई वीर सपूत दिए हैं। गांव की यही परंपरा आज भी आगे बढ़ रही है। गांव के कई युवा सेना की विभिन्न शाखाओं में कार्यरत हैं। इनमें से कई युवा अधिकारी बनकर अपनी जिम्मेदारियां भी निभा रहे हैं जिससे गांव का गौरव और बढ़ा है।
ग्रामीणों का कहना है कि करसोला में बचपन से ही युवाओं को अनुशासन, परिश्रम और राष्ट्रसेवा के संस्कार दिए जाते हैं। गांव का माहौल युवाओं को सेना में भर्ती होने और देश की सेवा करने के लिए प्रेरित करता है। यही वजह है कि हर वर्ष युवा सेना की विभिन्न भर्ती प्रक्रियाओं में भाग लेते हैं और सफलता भी हासिल करते हैं। ग्रामीणों के अनुसार गांव की सैनिक परंपरा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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वायु सेना में सेवा देना जीवन का गौरवपूर्ण अनुभव रहा है। उन्हें खुशी है कि आज भी करसोला के युवा देश सेवा को प्राथमिकता देते हुए सेना में भर्ती होकर गांव का नाम रोशन कर रहे हैं।-जगबीर सिंह लाठर (वायु सेना से सेवानिवृत्त)
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वर्दी पहनकर देश की सेवा करना हर युवा का सपना होता है। करसोला के युवाओं में देशभक्ति की भावना कूट-कूटकर भरी हुई है और यही उन्हें सेना की ओर प्रेरित करती है।-मोहित लाठर (वायु सेना में कार्यरत)
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देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करना गर्व की बात है। गांव से निकलकर राष्ट्र सेवा का अवसर मिलना उनके लिए सम्मान की बात है और वे चाहते हैं कि अधिक से अधिक युवा सेना में जाएं।-सुरेंद्र जांगड़ा (भारतीय नौसेना में कार्यरत)
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करसोला के युवाओं में अनुशासन और मेहनत की कमी नहीं है। यदि युवा लक्ष्य बनाकर तैयारी करें तो वे सेना और अन्य क्षेत्रों में बड़ी सफलता प्राप्त कर सकते हैं।- अशोक लाठर ग्रामीण।
गांव की सैनिक परंपरा नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। युवा न केवल देश की रक्षा कर रहे हैं, बल्कि करसोला का नाम भी पूरे देश में सम्मान के साथ स्थापित कर रहे हैं।-प्रदीप नागर, बीएसएफ में कार्यरत।