22जेएनडी06: कीर्तन में पहुंचे श्रद्धालु। संवाद
उचाना। पुरानी मंडी स्थित महाराजा अग्रसेन मंदिर में चल रहे भजन-कीर्तन में प्रवचन में मंदिर के पुजारी अशोक शर्मा ने कहा कि पानी के बिना नदी बेकार है, अतिथि के बिना आंगन बेकार है, स्नेह न हो तो सगे संबंधी बेकार है। पैसा न हो तो पॉकिट बेकार है और जीवन में सद्गुरु न हो तो जीवन बेकार है। जीवन में एक गुरु जरूरी है।
उन्होंने कहा कि यदि तुम चाहते हो कि तुम्हे कभी दिल का दौरा न पड़े तो तुम्हारे दिल में दो चीजों का होना जरूरी है। एक तो कब्रिस्तान और दूसरा मंदिर। अपने दिल में एक कब्रिस्तान बनाकर रखिए ताकि जब कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति में कोई दोष या बुराई दिखे तो उसे उस कब्रिस्तान में दफना सको। दिल में एक मंदिर का होना भी बहुत जरूरी है ताकि जब कभी किसी दूसरे में कोई गुण या खूबी दिखे तो उसे वहां से उठाकर अपने मन मंदिर में उसकी प्राण प्रतिष्ठा कर सको। आज से बढि़या दिन और कोई नहीं हो सकता। आपके पास जितना समय अभी है उससे अधिक समय कभी नहीं हो सकता। गलतियों से भी कुछ अनुभव हासिल करें। जिस तरह मंथरा के कहने पर कैकयी ने श्री राम को घर से वनो में भेज दिया था। वैसे कभी किसी की बातों में मत आना।