शहर को स्वच्छ रखने के लिए सरकार हर माह डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर रही है। लेकिन शहर में हर तरफ गंदगी का आलम है। यह बात कोई विपक्षी नेता, संगठन नहीं खुद नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी कह रहे हैं। नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने वीरवार को शहर का दौरा कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया तो सफाई की कलई खुल गई। इसके बाद उन्होंने अपने कार्यालय में सफाई से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों की बैठकर लेकर साफ शब्दों में कहा कि यदि एक सप्ताह में सफाई व्यवस्था नहीं सुधरी तो सभी का वेतन रोक दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने ठेकेदार को भी नियमित रूप से कूड़ा उठाने के लिए पत्र लिखने के आदेश दिए।
जींद शहर की सफाई दो प्रकार से की जाती है। एक तो नगर परिषद के 213 कर्मचारी हैं, जो कॉलोनियों व मुख्य मार्गों पर सफाई करते हैं। दूसरा शहर में कूड़ा उठाने के लिए ठेका दिया गया है। इसके लिए नगर परिषद कूड़ा उठाने के लिए ठेकेदार को प्रति टन 2280 रुपये देती है। शहर में औसतन प्रतिदिन 100 टन कूड़ा निकलता है। इस हिसाब से प्रतिदिन ठेकेदार को ही दो लाख 28 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा है। ऐसे में हर महीने करीब 68 लाख 40 हजार रुपये ठेकेदार को दिए जा रहे हैं। इसके अलावा नगर परिषद के 213 में से 106 नियमित व 107 अस्थायी कर्मचारी हैं। इनको भी प्रतिमाह वेतन दिया जा रहा है। ऐसे में शहर की सफाई पर प्रति महीना एक से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
ईओ को जवाब नहीं दे पाए जिम्मेदार
बैठक में कार्यकारी अधिकारी सुशील कुमार ने शहर के उन क्षेत्रों का जिक्र किया, जहां उन्होंने अपने निरीक्षण के दौरान कूड़ा देखा। यहां कूड़ा उठान नहीं होने का कोई भी कारण यह लोग नहीं बता पाए।
अब ऐसे बनेगी व्यवस्था
शहर में सफाई के लिए पांच जोन बनाए गए हैं। सभी जोन में एक सफाई दारोगा व एक अप्रेंटिस तैनात होगा। ये लोग सुनिश्चित करेंगे कि उनके जोन में सफाई में कहां दिक्कत आ रही है। इसके अलावा शहर में एक से 15 वार्ड तक स्वच्छता निरीक्षक नीलम रानी व 16 से 31 वार्ड तक सीएसआई मोहन भारद्वाज निगरानी रखेंगे।
लोग करें सहयोग
नगर परिषद द्वारा अपने संसाधनों के अनुरूप शहर में सफाई करवाई जा रही है। जहां कमी रह गई है उसे दूर किया जा रहा है। सफाई का काम लोगों के सहयोग के बिना नहीं हो सकता। सभी लोग घरों में दो डस्टबिन रखें। इनमें गीला व सूखा कूड़ा अलग-अलग हो। जब भी घर से कूड़ा लेने वाला वाहन आता है तो दोनों तरह का कूड़ा अलग-अगल डालें। वहीं टीम को सख्त हिदायत दी गई है कि जो लोग घरों व दुकानों के बाहर कूड़ा फेंकते हैं, उनके चालान काटें। सफाई व्यवस्था को सुधारने के लिए युद्ध स्तर पर काम किया जाएगा।
सुशील कुमार, कार्यकारी अधिकारी, जींद नगर परिषद।
शहर के झांझ गेट पर पड़ा कूड़ा। अमर उजाला- फोटो : Jind