जींद। जिले में विकास के दावे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। तीन साल पहले शुरू होने वाला आईसीयू आज तक शुरू नहीं हो पाया है। कोरोना काल में ही स्वास्थ्य निदेशालय ने आईसीयू शुरू करने के निर्देश दिए थे और 30 वेंटिलेटर भेजे थे। आईसीयू शुरू नहीं होने के कारण यह वेंटिलेटर धूल फांक रहे हैं। वहीं जिन गंभीर मरीजों को आईसीयू की जरूरत होती है, उनको रोहतक पीजीआई रेफर किया जाता है। समय पर आईसीयू की सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीज की मौत भी हो जाती है।
नागरिक अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग में जहां ऑपरेशन थिएटर थे, वहां पर आईसीयू शुरू करने के स्वास्थ्य निदेशालय ने निर्देश दिए थे। स्वास्थ्य विभाग ने इसकी मरम्मत करवाकर कार्य पूरा कर लिया, लेकिन आज तक आईसीयू शुरू नहीं हो पाया है। 2020 में आए कोरोना महामारी को देखते हुए नागरिक अस्पताल में आईसीयू की जरूरत महसूस हुई थी। 20 के आसपास वेंटिलेटर स्वास्थ्य निदेशालय ने भेजे थे, जबकि कुछ सामाजिक संस्थाओं ने भी दान किए थे। इस समय नागरिक अस्पताल में 30 वेंटिलेटर हैं, लेकिन बिना आईसीयू के यह धूल फांक रहे हैं। आईसीयू के लिए पूरी बिल्डिंग भी तैयार हो चुकी है, इसके बावजूद मरीजों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। जिन मरीजों को आईसीयू की जरूरत होती है, उनको रेफर कर दिया जाता है। कई बार समय पर वेंटिलेटर की सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीज की मौत भी हो जाती है, लेकिन आज तक इसकी तरफ किसी का ध्यान नहीं है।
बिना एमडी मेडिसिन के कैसे शुरू होगा आईसीयू
आईसीयू में जो मरीज दाखिल किए जाते हैं, उनको एमडी मेडिसिन ही दाखिल करते हैं। उनको उपचार तथा अन्य प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध करवाना एमडी मेडिसिन का कार्य होता है। इसके अलावा वेंटिलेटर चलाने का कार्य एन्सथिसिया चिकित्सक करते हैं। नागरिक अस्पताल कोई भी एमडी मेडिसिन ही उपलब्ध नहीं है, ऐसे में आईसीयू शुरू नहीं हो सकता।
आईसीयू के लिए 20 स्टाफ नर्स की जरूरत
नागरिक अस्पताल में आईसीयू चलाने के लिए 20 स्टाफ नर्स की जरूरत पड़ेगी। इसके अलावा 20 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ की भी जरूरत होगी। अस्पताल में पहले ही स्टाफ की कमी है। नागरिक अस्पताल में 151 स्टाफ नर्स के पद स्वीकृत हैं। इनमें से 99 ही कार्यरत हैं।
आईसीयू के लिए सभी उपकरण तैयार हो चुके हैं। स्वास्थ्य निदेशालय को स्टाफ की डिमांड भी भेजी गई है। इसमें कुछ सिविल कार्य बाकी था, जाे पूरा कर लिया गया है। जल्द ही जिले के लोगों काे आईसीयू की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
डॉ. जितेंद्र कादियान, प्रधान चिकित्सा अधिकारी।