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दिव्यांगों की बेकद्री: न मिले टोकन, न हुआ मेडिकल, अस्पताल में हंगामा

Wed, 24 May 2017 11:20 PM IST
ब्यूरो अमर उजाला जींद
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चिलचिलाती धूप में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लाइन में लगे दिव्यांग और उनके परिजन। - फोटो : amarujala beuro
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नागरिक अस्पताल में प्रमाण पत्र बनवाने पहुंचे दिव्यांगों को प्रशासन की बदइंतजामी की मार झेलनी पड़ी। बुधवार को अप्वाइंटमेंट लेकर पहुंचे 60 दिव्यांगों को प्रमाण पत्र बनाने के लिए स्टाफ नहीं मिला। दिव्यांगों को चिलचिलाती धूप में खड़े होकर इंतजार करना पड़ा। जब दो घंटे बाद भी उनकी सुध नहीं ली गई तो दिव्यांग और उनके परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। मामला इस कदर बढ़ा कि प्रशासन को पुलिस तक बुलानी पड़ी। बाद में सिविल सर्जन के आश्वासन पर दिव्यांग और उनके परिजन शांत हुए।
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दरअसल, इसी माह मुख्यमंत्री के जींद प्रवास के दौरान दिव्यांगों ने प्रमाण पत्र बनने में आ रही दिक्कतों का मामला उठाया था। प्रशासन ने पिछले बुधवार से यहां टोकन व्यवस्था लागू कर दी। बुधवार को प्रमाण पत्र बनाने के लिए 60 लोगों को अप्वाइंटमेंट दी गई थी, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर इन लोगों को प्रमाणपत्र बनाने के लिए स्टाफ नहीं मिला। करीब साढ़े दस बजे तक इंतजार करने के बाद दिव्यांगों ने हंगामा शुरू कर दिया। जिन लोगों ने टोकन ले रखा था, उनका आरोप है कि टोकन के बाद भी उनका प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा रहा है। उन्हें चिलचिलाती धूप में दो-दो घंटे खड़ा रखने के बाद अधिकारी अगले सप्ताह आने की बात कह देते हैं। करीब एक घंटे तक हंगामा करने के बाद दिव्यांग और उनके परिजन सिविल सर्जन ऑफिस पहुंच और यहां भी रोष जताया। इन लोगों ने कहा कि अधिकारी एसी दफ्तरों में बैठते हैं और जो लोग धूप में जल रहे हैं, उनकी सुध नहीं ली जाती। इसके बाद सिविल सर्जन ने प्रमाण पत्र के लिए आए सभी लोगों को अप्वाइंटमेंट देने और जिन लोगों की अप्वाइंटमेंट हैं, उनके प्रमाण पत्र बनाने का आश्वासन दिया, जिस पर लोग शांत हुए।


रजिस्टर गायब होने से बढ़ी परेशानी
अस्पताल के अधिकारियों ने बताया कि दिव्यांगों की सुविधा के लिए 60 लोगों को अप्वाइंटमेंट दी जाती है। बुधवार के लिए 60 और अगले बुधवार के लिए 36 लोगों ने अप्वाइंटमेंट भी ली, लेकिन वह रजिस्टर अस्पताल से गायब हो गया है। इस कारण यह पता नहीं चल पाया कि किसकी अप्वाइंटमेंट है और किसकी नहीं। वहीं, दिव्यांगों के परिजनों ने कहा कि प्रशासन की ओर से जारी मोबाइल नंबर पर बार-बार फोन करने के बाद भी अप्वाइंटमेंट नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाए कि अस्पताल अपने चहेतों की ही अप्वाइंटमेंट कर रहा है।
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एक महीने से काट रहा हूं चक्कर
वह चार बुधवार से यहां चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे वापस भेज दिया जाता है। दिव्यांग होने के कारण उसे एक व्यक्ति को साथ लेकर आना पड़ता है। इससे घर का काम भी प्रभावित होता है।
-राजेंद्र, दिव्यांग, गांव बड़ोदा

नेत्रहीन है दस साल का बेटा, नहीं हो रही सुनवाई
मेरा दस साल का बेटा नेत्रहीन है। उसका प्रमाण पत्र बनवाने के लिए कई चक्कर काट चुका हूं। न तो फोन पर अप्वाइंटमेंट मिल रही है और न ही प्रमाण पत्र बन रहा है। हर बार मुझे और मेरी पत्नी को भी साथ आना पड़ता है। इससे सभी काम प्रभावित हो रहे हैं।
-रमेश, अलीपुरा

प्रशासन ने हर सप्ताह 60 लोगों को अप्वाइंटमेंट देकर प्रमाण पत्र बनाने की व्यवस्था बनाई है। इसके लिए दो फोन नंबर भी जारी किए गए हैं। जो लोग फोन पर अप्वाइंटमेंट नहीं मिलने का आरोप लगा रहे हैं, वे देर रात और सुबह पांच बजे फोन करते हैं। उस समय कर्मचारी फोन नहीं उठा सकता। वहीं, रजिस्टर गायब होने से परेशानी हुई है। इस संबंध में सिविल लाइन थाना पुलिस को शिकायत दी गई है। जो लोग यहां पहुंचे हैं, सभी को आगे के लिए अप्वाइंटमेंट दे दी गई है। जिन लोगों की अप्वाइंटमेंट थी, उनके प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। एक साथ अधिक लोग आने के कारण व्यवस्था बिगड़ी है।
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- डॉ. संजय दहिया, सिविल सर्जन
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