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आग के साये में भविष्य, नाम के यंत्रों के भरोसे तंत्र

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जींद। जिले में 150 से ज्यादा बहुमंजिला भवनों में कोचिंग सेंटर बच्चों की जान के साथ खिलवाड़ कर चलाए जा रहे हैं। इन बहुमंजिला भवनों में से अधिकतर बिना किसी अनुमति और वैध प्रक्रिया के चल रहे हैं। इनमें से केवल छह से सात कोचिंग सेटरों ने ही दमकल विभाग से एनओसी ले रखी है। इन सेंटरों में अग्नि सुरक्षा के प्रबंध नहीं हैं।
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कई कोचिंग सेंटर ऐसे हैं कि अगर इनमें आग की घटना हो गई तो बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक या इमरजेंसी गेट तक नहीं हैं। सभी कोचिंग सेंटर बिना फ ायर एनओसी के चल रहे हैं। आग से बचाव के कारगर प्रबंध नहीं होने के कारण भविष्य में बड़ा हादसा भी हो सकता है। शहर में चल रहे कोचिंग सेंटर के पास अग्निशमन विभाग की एनओसी तक नहीं है। नेशनल बिल्डिंग एक्ट का पालन नहीं किया जा रहा है। जिन बिल्डिंगों को फायर एनओसी दी जाती है, उन्हें भवनों की साइज और ऊंचाई के हिसाब से आग से सुरक्षा के इंतजाम करने होते हैं। अधिकांश भवनों में सुरक्षा के नाम पर सुरक्षा यंत्र ही लगे हुए हैं। इनके समय से रिफि ल कराने की कोई गारंटी नहीं होती। न ही भवन में रहने वाले लोगों को इमरजेंसी में इन्हें चलाने की कोई ट्रेनिंग दी जाती है। फ ायर ब्रिगेड के नियमानुसार बहुमंजिला इमारतों में तो पाइप लाइन और अंडरग्राउंड वाटर टैंकों से आग बुझाने की व्यवस्था करना जरूरी होता है। इमरजेंसी गेट नहीं होने के कारण घटना होने पर इन भवनों से बच्चों को सुरक्षित आसान निकालना मुश्किल साबित हो सकता है।
भवनों का सर्वे कर भेजे जाएंगे नोटिस
शहर में बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग सेंटर चल रहे हैं, जिनमें आग से बचाव के कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। नियमों की पालन नहीं करने वाले कोचिंग सेंटरों और दूसरे भवन मालिकों को नोटिस देने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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--सुनील वर्मा सहायक फायर सेफ्टी अधिकारी दमकल विभाग जींद।
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