वाटर कूलर की आड़ में अपनी प्यास बुझा रहे पंचायत के मुखिया
- ग्राम पंचायतों में वाटर कूलर व डस्टबिन लगाने के नाम पर हो रहा घपला
- कम कीमत के वाटर कूलर व डस्टबिन के मोटे बिल पास करवा रहे सरपंच
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। पंचायतों द्वारा गर्मी में प्यास बुझाने के लिए गांवों में लगाए जा रहे वाटर कूलर की आड़ में पंचायत के मुखिया अपनी प्यास बुझा रहे हैं। पंचायत के मुखियाओं द्वारा वाटर कूलर के नाम पर जमकर लूट मचाई जा रही है। महज 40 से 45 हजार रुपये में तैयार होने वाले वाटर कूलरों के लाखों रुपये के बिल पास करवाकर सरपंच मोटी राशि हड़प रहे हैं। इसी प्रकार प्रधानमंत्री के स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने के नाम पर गांव में डस्टबिन लगाकर भी सरपंच भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं। महज 1500 रुपये में तैयार होने वाले डस्टबिन के बदले सरपंच पंचायत फंड से तीन-तीन हजार रुपये वसूले रहे हैं। इस प्रकार वाटर कूलर व डस्टबिन लगाने के नाम पर पंचायतों में भारी भ्रष्टाचार हो रहा है। भ्रष्टाचार के इस खेल में एक पूरा गिरोह सक्रिय है और इस गिरोह में कुछ सरपंच भी शामिल हैं, जो इस काम को अपने बिजनेस के तौर पर अपना चुके हैं।
लगाया जा रहा घटिया क्वालिटी का सामान
ग्राम पंचायत के मुखियाओं द्वारा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए खर्च की गई मोटी राशि को वसूल करने का सबसे आसान साधन वाटर कूलर व आरओ बन गए हैं। क्योंकि ग्राम पंचायत के मुखिया का गांव में वाटर कूलर व आरओ लगवाने का सीधा उद्देश्य इसकी आड़ में अधिक रुपये कमाना है। इसके लिए वह वाटर कूलर व आरओ के सप्लायरों से सीधा संपर्क कर घटिया क्वालिटी का सामान डलवा देते हैं। इससे वाटर कूलर व आरओ की कीमत काफी कम हो जाती है। जबकि इसी घटिया क्वालिटी के आरओ व वाटर कूलर का बिल वह लाखों रुपये में पास करवाते हैं। ऐसे में पंचायतों द्वारा लगाए जा रहे वाटर कूलर व आरओ के सामान की क्वालिटी पर भी सीधे सवाल उठ रहे हैं।
बिजली की हो रही है चोरी
ग्राम पंचायतों द्वारा जहां-जहां पर वाटर कूलर लगाए गए हैं, उनमें से ज्यादातर वाटर कूलर चोरी की बिजली से चल रहे हैं। क्योंकि गांव में ज्यादातर लोग बिजली की चोरी करते हैं, ऐसे में वह वाटर कूलर को भी चोरी की बिजली से चला रहे हैं। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर जो वाटर कूलर लगाए गए हैं, उनके लिए भी किसी के मकान से कनेक्शन नहीं लिया गया है। सार्वजनिक स्थान पर रखे वाटर कूलर भी चोरी की बिजली से ही चल रहे हैं। वाटर कूलरों की आड़ में हो रही बिजली की चोरी से निगम को हर माह लाखों रुपये का चूना लग रहा है।
लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं नसीब हो रहा वाटर कूलर का पानी
पंचायत के मुखिया द्वारा ग्रामीणों को शुद्ध पानी मुहैया करवाने के लिए गांव में वाटर कूलर तो लगवा दिए गए हैं लेकिन ज्यादातर वाटर कूलरों में अभी तक पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई है। इस प्रकार यह वाटर कूलर ग्रामीणों के लिए सफेद हाथी बने हुए हैं। जबकि वाटर कूलर लगवाने के बाद सरपंच इन वाटर कूलरों की ग्रांट तक हजम कर चुके हैं। लाखों खर्च करने के बाद भी ग्रामीणों को वाटर कूलर का पानी नसीब नहीं हो पा रहा है।
ऊपर से नीचे तक होती है सांठ-गांठ
पंचायत के मुखियाओं द्वारा ग्रामीण क्षेत्र में लगाए जा रहे आरओ व वाटर कूलर के बिल पास करवाने में किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आए, इसके लिए पंचायत के मुखिया ऊपर से नीचे तक के अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में लगाए जा रहे आरओ, वाटर कूलर, स्ट्रीट लाइट तथा अन्य बिजली के उपकरणों की क्वालिटी की जांच के लिए जोन स्तर पर पंचायती राज के एक-एक अधिकारी को नियुक्त किया गया है लेकिन यह अधिकारी भी सही तरीके से उपकरणों की जांच किए बिना ही चुपचाप अपना हिस्सा लेकर उपकरणों को पास कर देेते हैं।
गांव में बिजली के उपकरण लगवाने के लिए यह है कानूनी प्रक्रिया
यदि पंचायत के मुखिया को गांव में वाटर कूलर, आरओ, स्ट्रीट लाइट या अन्य कोई बिजली का उपकरण लगवाना है तो उसको सबसे पहले ग्राम पंचायत की बैठक में प्रस्ताव डालकर उसे पास करवाना होगा। इसके बाद कम से कम तीन विक्रेताओं से उसकी कुटेशन लेनी होती है। जिस विक्रेता के रेट कम और क्वालिटी सही होती है उससे सामान लगवाया जाता है। इसके बाद उस विक्रेता को राशि अदा करने से पहले सरकार द्वारा नियुक्त किए गए पंचायती राज के अधिकारी से उसकी क्वालिटी की जांच करवा कर उसे पास करवाना होता है। जांच अधिकारी की जांच में उपकरण की क्वालिटी सही पाई जाने के बाद ही विक्रेता को राशि का भुगतान करना होता है लेकिन ग्राम पंचायतों के मुखिया इस पचड़े से बचने के लिए अधिकारियों के साथ सीधे सांठ-गांठ कर लेते हैं। प्रस्ताव के साथ दर्शाई जाने वाली कुटेशन भी ज्यादातर फर्जी होती हैं।
ग्राम पंचायत द्वारा वाटर कूलर लगवाने के बाद पंचायती राज विभाग से वाटर कूलर की क्वालिटी की जांच करवानी होती है, लेकिन अभी तक किसी भी ग्राम पंचायत की तरफ से उनके पास वाटर कूलर की तकनीकी जांच के लिए कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। यदि किसी ग्राम पंचायत द्वारा बिना विभाग की अनुमति लिए या वाटर कूलर की क्वालिटी की जांच करवाए बिना वाटर कूलर लगवाए गए हैं तो यह नियमों के विरुद्ध है और इसकी जांच करवाई जाएगी।
-पूनिया, एसडीओ
पंचायती राज
बनाया जाएगा बिजली चोरी का केश
यदि ग्राम पंचायत किसी सार्वजनिक स्थान पर कोई वाटर कूलर लगवाती है तो उसके बिल के भुगतान की जिम्मेदारी पंचायत की होती है और यदि किसी व्यक्ति के मकान के बाहर लगाया जाता है तो उसके बिल की जिम्मेदारी उक्त व्यक्ति की होती है। यदि चोरी की बिजली से वाटर कूलर चल रहे हैं तो इसकी जांच करवाई जाएगी और जिस भी ग्राम पंचायत में वाटर कूलर की आड़ में बिजली चोरी का मामला मिलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
कुलदीप मोर, एसडीओ
पिल्लूखेड़ा, बिजली निगम