जींद। शहर को साफ और नहरी पानी उपलब्ध कराने की परियोजना को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। 400 करोड़ की परियोजना शुरू करने की सीएम की घोषणा के चार साल बाद भी जलघर के लिए जनस्वास्थ्य विभाग जमीन तक नहीं तलाश पाया है। इस कारण शहर की करीब ढाई लाख आबादी को भूमिगत पानी पीना पड़ रहा है।
पेयजल के मामले में जींद शहर दो भागों में बंटा है। एक हिस्सा हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण का है, जहां करीब सात हजार घरों में नहरी पेयजल मुहैया करवाया जा रहा है। इसके अलावा बाकी शहर की करीब ढाई लाख आबादी को भूमिगत पानी मिल रहा है। सेक्टरों को छोड़कर शहर की सभी कॉलोनियों में ट्यूबवेलों का पानी सप्लाई किया जाता है। भूमिगत पानी का टीडीएस बहुत ज्यादा है, जो सेहत के लिए खतरनाक है। भूमिगत पानी में टीडीएस (टोटल डिजॉल्व सॉलिड) की मात्रा 900 से 2000 तक है। ऐसा पानी पीने से कैंसर, लीवर, किडनी जैसी बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए प्रशासन भाखड़ा नहर का पानी सप्लाई करने की योजना बना रहा है। हालांकि जनस्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है कि प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 155 लीटर पानी मुहैया करवाया जा रहा है, लेकिन हकीकत इसके विपरीत है।
नहरी पेयजल जींद शहर की दशकों पुरानी मांग है। इसको लेकर पिछले लंबे समय से योजना बनती आ रही हैं, लेकिन अभी तक यह सिरे नहीं चढ़ पाई है। हालांकि करीब डेढ़ साल पहले प्रदेश सरकार ने जींद को नरवाना के पास से बह रही भाखड़ा नहर से जींद को पानी देने की योजना को भी स्वीकार कर लिया गया, लेकिन अब जलघर के लिए जमीन नहीं मिल पा रही है। परियोजना जींद शहर की अब तक की सबसे बड़ी परियोजना है, लेकिन इसमें प्रशासन को सफलता नहीं मिल रही है। इसके तहत नरवाना से करीब 35 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन डालकर जींद में पानी आएगा।
ई-भूमि पोर्टल पर भी नहीं मिली जमीन
जलघर के लिए जमीन नहीं मिलने पर जनस्वास्थ्य विभाग ने ई-भूमि पोर्टल पर भी जमीन की मांग की। यहां किसान अपनी जमीन देने के लिए कीमत के साथ ऑफर कर सकते हैं। इसके लिए झांझ गांव की पंचायत ने जमीन का प्रस्ताव भी रखा, लेकिन यह मेन रोड से दूर होने के कारण अस्वीकृत हो गई। इससे पहले जनस्वास्थ्य विभाग की ओर से पिंडारा, राजपुरा भैण व किनाना गांवों में भी जमीन देखी गई थी, लेकिन यहां पंचायतों ने जमीन देने से मना कर दिया।
भाखड़ा नहर से पानी मिलने का फायदा
नहरी पेयजल के लिए जनस्वास्थ्य विभाग द्वारा हांसी या सुंदर ब्रांच नहर से पानी लेने की योजना भी बनाई गई थी। यह परियोजना कम खर्चीली होती, लेकिन इन दोनों ही नहरों में पानी की उपलब्धता कम होती है। वहीं भाखड़ा नहर में पूरा साल पानी बहता है। इससे जनस्वास्थ्य विभाग को पानी एकत्रित करने के लिए कम क्षमता की व्यवस्था करनी पड़ेगी।
100 एकड़ जमीन की दरकार
नहरी पेयजल परियोजना के लिए जनस्वास्थ्य विभाग को करीब 100 एकड़ जमीन चाहिए। इसमें आधुनिक जलघर की व्यवस्था की जाएगी। एक साथ इतनी अधिक जमीन मिलने में दिक्कत आ रही है।
सबमर्सिबल व कैंपर का सहारा
फिलहाल शहर में पेयजल के लिए लोग अपने-अपने घरों में सबमर्सिबल व आरओ के सहारे हैं। वहीं कार्यालयों में कैंपर सप्लाई होते हैं। जींद शहर में एक दिन में करीब पांच हजार से अधिक कैंपर सप्लाई होते हैं। यहां तक कि सरकारी विभागों के कार्यालयों भी पेयजल के लिए कैंपर की सप्लाई आती है।
परियोजना तैयार की जा रही है, लेकिन जमीन नहीं मिल रही। इस कारण यह परियोजना अधूरी पड़ी है। ई-भूमि पोर्टल पर मांगी गई जमीन झांझ गांव में मिल रही थी, लेकिन यह मुख्य मार्ग से काफी दूर होने के कारण यहां जलघर बनाना संभव नहीं है। ऐसे में अब दोबारा से जमीन की तलाश की जा रही है।
- राजेंद्र जांगड़ा, एसई, जनस्वास्थ्य विभाग जींद।