जिले के महाभारत कालीन 18 तीर्थ स्थलों के अच्छे दिन आने वाले हैं। इसके लिए चंडीगढ़ राजभवन में हुई कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की मीटिंग में व्यापक योजना बनी है। इतना नहीं नहीं कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड प्रदेश भर के ऐसे नए धार्मिक स्थलों का भी पता लगाएगा, जो अब तक लोगों की जानकारी में नहीं है। कुरुक्षेत्र की 48 कोस की परिधि में महाभारत कालीन 304 तीर्थ आते हैं। इनमें जींद जिला के 18 तीर्थ भी शामिल हैं। जींद जिला के सभी महाभारत कालीन तीर्थ अब तक कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की योजनाओं से महरूम रहे हैं। पांडू पिंडारा तीर्थ को छोड़कर अन्य जगहों पर कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का ध्यान ही नहीं पड़ा है। ऐसे में अब कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने प्रदेश भर में नए धार्मिक स्थलों की पहचान करने की भी योजना बनाई है। अब नई योजना के तहत सभी धार्मिक स्थलों को पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाएगा।
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जींद जिला के धार्मिक स्थल
तीर्थ स्थल जगह
कुश तीर्थ कुचराना कलां
लोकद्वार तीर्थ लोधर
काया सोधन तीर्थ कसुहन
वंश मूलक तीर्थ बरसोला
भूतेश्वर तीर्थ जींद (रानी तालाब)
एकहंस तीर्थ ईक्कश
सन्निहित तीर्थ रामराये
पुष्कर तीर्थ पोकरीखेड़ी
सोम तीर्थ पिंडारा
वराह तीर्थ बराह खुर्द
अश्वनी कुमार तीर्थ आसन
ययाति तीर्थ कालवा
हटकेश्वर तीर्थ हाट
जमदगनी तीर्थ जामनी
सर्पदमन तीर्थ सफीदों
मंयकुक तीर्थ सींक
नोट: मंयकुक तीर्थ पानीपत जिला में आता है, लेकिन बोर्ड ने इसका विकास जींद के धार्मिक स्थलों के साथ जोड़कर करवाने का फैसला लिया है।
ईंटल को भी करवाया जाएगा शामिल
कुुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य और भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. ओपी पहल के अनुसार हाल ही में जींद जिला के ईंटल गांव में भी धार्मिक अवशेष मिले हैं। ऐसे में ईंटल गांव को भी कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधीन लाया जाएगा।
महाभारत काल की विरासत को संजोए है जींद
जींद जिला महाभारत काल की विरासत को संजोए हुए है। इसमें सर्वप्रथम पांडू पिंडारा तीर्थ का नाम आता है। मान्यता है कि कुरुक्षेत्र का युद्ध समाप्त होने के बाद पांडवों ने अपने पितरों की तपर्ण के लिए पिंडारा में 12 साल तक सोमवती अमावस्या का इंतजार किया था।
एकहंस तीर्थ:
ईक्कश गांव स्थित एकहंस तीर्थ की मान्यता है कि भीम से बचने के लिए दुर्योधन ने इसी तीर्थ में जल समाधि ली थी। मान्यता है कि एकहंस तीर्थ के किनारे पर ही दुर्योधन का वध भीम ने किया था।
-सन्निहित तीर्थ : यहां परशुराम ने तपस्या की थी। इसका महत्व रामायण काल का है।
- भूतेश्वर तीर्थ: मान्यता है कि चंद्रमा ने अपने कुष्ठ रोग से निजात पाने के लिए यहां स्नान किया था।
- जमदगनी तीर्थ: मान्यता है कि भगवान परशुराम की मां जमदगनी ने जामनी गांव में ही भगवान परशुराम को जन्म दिया था।
अधिकतर तीर्थ बने पशु तालाब
उपेक्षा का आलम यह है कि कई तीर्थ तो पशु तालाब का रूप ले चुके हैं। ईक्कश गांव के एकहंस तीर्थ सहित कई ऐसे तीर्थ स्थल हैं, जहां कोई विकास कार्य नहीं हुआ है। ये तीर्थ गांवों के साधार पशु तालाबों की तरह ही हैं।
साफ-सफाई का ध्यान दे कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड
पांडू पिंडारा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधीन आता है, लेकिन बोर्ड तीर्थ की ओर कोई ध्यान नहीं है, यहां सोमवती अमावस्या के दिन पिंडारा तीर्थ पर काफी गंदगी फैल जाती है। जबकि तीर्थ की साफ-सफाई का जिम्मा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड का है, लेकिन गांव की पंचायत ही अपने स्तर पर साफ-सफाई करवाते हैं।
- विक्की गिल, पिंडारा निवासी।
विकास कमेटी के द्वारा ही होते है विकास कार्य
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड तो तीर्थ की साफ-सफाई का कोई ध्यान नहीं दे रहा। यहां सफाई व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों से चंदा ईक्ठ्ठा कर व अमावस्या के दिन पंडों की पर्ची काटी जाती है, और पंचायत के सहयोग से पांडू पिंडारा की साफ-सफाई की जाती है। इस बारे में प्रसाशन ने भी साफ-सफाई में महत्व पूर्ण योगदान रहा है, प्रसाशन द्वारा 25 व्यक्तियों की विकास कमेटी बनाई गई है।
- महंत पूनम पुरी, सदस्य विकास कमेटी।
तीर्थ पर फैली है गंदगी
यहां परशुराम तीर्थ का काफी पुराना इतिहास है। और कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड की देख-रेख में आता है, लेकिन तीर्थ के चारों और गंदगी फैली रहती है, जिससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। साफ-सफाई व्यवस्था बनाने के लिए खुद ही सफाई करते है।
- हरिचंद साधु, रामराये गांव।
विकास करे बोर्ड
गांव का तीर्थ सरकार की उपेक्षा के चलते सामान्य पशु तालाब बन चुका है। ऐसे में सरकार को यहां ध्यान देना चाहिए। लोग चाहते हैं कि तीर्थ स्थल विकसित हो। यह तीर्थ कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के अधीन आता है या नहीं इसकी जानकारी नहीं है।
- कृष्ण सिंह, ईक्कस निवासी।
पिछली सरकार के समय कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ही उपेक्षित था। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बोर्ड की मीटिंग अब तीन साल में हुई है। जींद के तीर्थ स्थलों की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। अब लोगों से आह्वान है कि यदि किसी और भी धार्मिक स्थल की जानकारी है तो वे बताएं। सभी तीर्थ स्थलों का विकास करवाया जाएगा।
- ओपी पहल, सदस्य कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड