संवाद न्यूज एजेंसी
जींद। जिले में दो दिन की राहत के बाद शुक्रवार सुबह कोहरे व घनी धुंध छाए रहने से जनजीवन प्रभावित रहा। धुंध इतनी घनी थी कि दृश्यता मात्र पांच मीटर तक रह गई। सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए और वाहन चालकों को लाइट जलाकर बेहद सावधानी से सफर करना पड़ा। रात में न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस घटकर 7 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। घना कोहरा छाने से लोगों की ठिठुरन बढ़ गई।
कई स्थानों पर राष्ट्रीय व राज्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। धुंध के साथ-साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई जिससे ठंड का असर और बढ़ गया। सुबह छह बजे से 11 बजे तक जिले में दृश्यता बेहद कम रही। सुबह छह बजे दृश्यता करीब पांच से दस मीटर की थी। इससे सड़क पर आगे कुछ भी साफ नजर नहीं आ रहा था।
सात बजे तक दृश्यता में मामूली सुधार हुआ लेकिन फिर भी दृश्यता 15 मीटर के आसपास रही। आठ बजे के करीब दृश्यता 20 से 30 मीटर तक पहुंची, जबकि नौ बजे यह बढ़कर लगभग 50 से 60 मीटर रही। सुबह दस बजे तक धुंध धीरे-धीरे छंटनी शुरू हुई और दृश्यता 80 से 100 मीटर तक पहुंच गई। 11 बजे के बाद धूप निकलने से हालात सामान्य होने लगे और दृश्यता में तेजी से सुधार हुआ।
धुंध के कारण सुबह के समय स्कूल जाने वाले बच्चों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और किसानों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची सड़कों और खेतों के पास दृश्यता और भी कम रही। कई वाहन चालक दुर्घटना की आशंका के चलते सड़क किनारे रुकते नजर आए।
दोपहर बाद निकली धूप
दोपहर बाद मौसम ने करवट ली और तेज धूप निकल आई। धूप खिलते ही तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। धूप निकलने के बाद किसानों ने भी खेतों का रुख किया। दोपहर बाद मौसम साफ होने पर गेहूं की फसल में आवश्यक स्प्रे और खाद डालने का काम शुरू किया गया।
धुंध और ठंड में अस्थमा और एलर्जी के मरीज सावधानी बरतें
नागरिक अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. राजेश भोला ने बताया कि लगातार धुंध और ठंड का असर मानव स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। धुंध में मौजूद प्रदूषक तत्व सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इससे सर्दी, खांसी, जुकाम, गले में खराश और सांस संबंधी समस्याएं बढ़ जाती हैं। अस्थमा और एलर्जी के मरीजों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। आंखों में जलन, सिरदर्द और थकान की समस्या भी देखने को मिलती है। बच्चों और बुजुर्गों में धुंध के कारण बीमार होने का खतरा अधिक रहता है। बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने के कारण वे जल्दी सर्दी-जुकाम और वायरल संक्रमण की चपेट में आ जाते हैं। वहीं, बुजुर्गों में सांस, हृदय और जोड़ों से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
वर्जन
कोहरे व धुंध का असर गेहूं की फसल पर अपेक्षाकृत कम पड़ता है। सरसों, चना, सब्जियों और अन्य रबी फसलों के लिए यह नुकसानदायक माना जाता है। कोहरे व धुंध के कारण पत्तों पर अधिक नमी जमा हो जाती है। इससे फंगल रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है। फसल की बढ़वार प्रभावित होती है और उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
-डॉ. गिरीश नागपाल, डीडीए
वर्जन
आने वाले दिनों में भी सुबह के समय धुंध बने रहने की संभावना है जबकि दोपहर बाद मौसम साफ रहने की उम्मीद है। ऐसे में लोगों को सावधानी बरतने और स्वास्थ्य व यातायात से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।
-डॉ. राजेश कुमार मौसम वैज्ञानिक जींद।
फोटो कैप्शन
26जेएनडी23से 26 : धुंध से गुजरते वाहन व आसमान में छाई धुंध। संवाद
26जेएनडी27: सर्दी से बचने के लिए बच्चे व बुजुर्ग आग से सेंकते हुए। संवाद
26जेएनडी28: सुबह 11 बजे खेत से बरसीम काटते हुए महिला किसान। संवाद
26जेएनडी23से 26 : धुंध से गुजरते वाहन व आसमान में छाई धुंध। संवाद- फोटो : महोली में काव्य पाठ करता कवि।
26जेएनडी23से 26 : धुंध से गुजरते वाहन व आसमान में छाई धुंध। संवाद- फोटो : महोली में काव्य पाठ करता कवि।
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26जेएनडी23से 26 : धुंध से गुजरते वाहन व आसमान में छाई धुंध। संवाद- फोटो : महोली में काव्य पाठ करता कवि।