30जेएनडी28: शुद्ध रसोई में जरूरतमंदों को भोजन परोसतीं सिविल जज महिमा जैन शांडिल्य। स्रोत : फाउं
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उचाना। जरूरतमंदों को सम्मान के साथ भरपेट भोजन उपलब्ध करवाना समाजसेवा का सराहनीय उदाहरण है। ऐसे प्रयास समाज के दूसरे लोगों को भी सेवा के लिए प्रेरित करते हैं। यह बात सिविल जज जूनियर डिविजन मथुरा महिमा जैन शांडिल्य ने उपमंडल कार्यालय के सामने रामरती मेमोरियल जनहित फाउंडेशन की ओर से संचालित शुद्ध रसोई में कही।
महिमा जैन शांडिल्य ने कहा कि भोजन हर व्यक्ति की बुनियादी जरूरत है। किसी जरूरतमंद को दो वक्त का खाना उपलब्ध करवाना मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा कार्य है। ओमप्रकाश शर्मा भौंगरा के नेतृत्व में शुद्ध रसोई द्वारा किया जा रहा प्रयास सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इस सेवा कार्य में सहभागी बनकर उन्हें खुशी हुई।
शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए सिविल जज ने कहा कि शिक्षित युवा ही समाज और देश की तरक्की में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। नौकरी मिले या न मिले, शिक्षा जीवन के हर पड़ाव पर काम आती है।
उन्होंने बेटियों की शिक्षा और आत्मनिर्भरता को जरूरी बताते हुए कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा साबित कर रही हैं। अभिभावकों को चाहिए कि वे बेटियों के सपनों को समझें और उन्हें पूरा करने में सहयोग दें। परिवार का प्रोत्साहन मिलने पर बेटियां भी अपनी मेहनत और योग्यता से ऊंचे मुकाम हासिल कर सकती हैं।