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तीन अध्यादेशों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान यूनियन ने प्रधानमंत्री को भेजे एक हजार पत्र

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डाकघर के कर्मचारियों को पोस्टकार्ड सौंपते किसान। - फोटो : Jind
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सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए लाए गए तीन अध्यादेशों को वापस लेने की मांग करते हुए भारतीय किसान यूनियन ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक हजार पत्र भेजे। इस दौरान यूनियन के नेताओं ने वीरवार को पिपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में नारेबाजी की।
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बीकेयू के कार्यकर्ता राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रामफल कंडेला के नेतृत्व में किसान शुक्रवार सुबह शिव कॉलोनी स्थित यूनियन के कार्यालय में एकत्रित हुए। रामफल कंडेला ने कहा कि सरकार द्वारा कृषि क्षेत्र के लिए लाए गए तीनों अध्यादेश किसानों को तबाह करने वाले हैं। इनसे सिर्फ बड़ी कंपनियों को ही फायदा होगा। ऐसे में देशभर के किसान एकजुट होकर इनके खिलाफ लड़ेंगे। इस लड़ाई की कड़ी में ही जींद जिले से शुक्रवार को एक हजार किसानों के हस्ताक्षरयुक्त पोस्टकार्ड भेजे गए हैं। इनमें किसानों द्वारा तीनों अध्यादेश वापस लेने की मांग की गई है। इसके बाद किसान प्रदर्शन करते हुए शिव कॉलोनी से स्कीम नंबर 19 स्थित मुख्य डाकघर तक पहुंचे और यहां पर डाक विभाग के अधिकारियों को पोस्टकार्ड सौंपे। इस मौके पर छज्जूराम कंडेला, रामराजी ढुल, रामफल नंबरदार, राजकुमार, रणधीर, रामपाल, बिंद्र, काला, ईश्वर व सूरजमल मौजूद रहे।
जींद में आढ़तियों ने अनाज मंडी गेट पर ताला जड़कर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
पिपली में किसानों पर लाठीचार्ज और पिपली जा रहे जिले के आढ़तियों को हिरासत में लेने, उन पर केस दर्ज करने के रोष स्वरूप शुक्रवार को आढ़ती एसोसिएशन ने रोष जताया। इसको लेकर आढ़तियों ने दोपहर में अनाज मंडी के गेट पर ताला लगाकर नारेबाजी की। बाद में उन्होंने मार्केट कमेटी के सचिव संजीव कुमार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
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दोपहर करीब ढाई बजे अनाज मंडी के आढ़ती एकत्रित हुए और एक नंबर गेट को बंद कर नारेबाजी शुरू कर दी। सूचना मिलते ही मार्केट कमेटी के सचिव संजीव कुमार मौके पर पहुंचे और उन्होंने गेट खुलवाया। आढ़तियों ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए तीन अध्यादेशों के खिलाफ प्रदेशभर के किसान, आढ़ती, मुनीम व मजदूर शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने तानाशाही रवैया अपनाया। ज्ञापन में कहा गया कि पिपली जाने वाले आढ़तियों को पुलिस षड्यंत्र के तहत अनाज मंडियों में ही बंधक बना लिया। पिपली में निहत्थे किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया। आढ़तियों, किसानों, मुनीमों व मजदूरों पर सरकार ने जो झूठे मुकदमे दर्ज किए हैं उन्हें वापस लिया जाए और जिन प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के कहने पर पुलिसकर्मियों ने उन पर डंडे बरसाए हैं, उनकी जिम्मेदारी तय कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।
इस अवसर पर रमन गोयल, रमेश बतरा, जगत सिंह रेढू, जुगती राम श्योराण, संदीप मलिक, अजीत ढांडा, सत्यवान शर्मा, प्रभु चहल, राजेश अशोक शर्मा, रामेहर शर्मा, रोशन शर्मा व सुरेश रेढू मौजूद रहे।
बेहद गोपनीय ढंग से बनी योजना
हालांकि वीरवार को पिपली में किसानों पर लाठीचार्ज होने के कारण शुक्रवार को पुलिस की खुफिया व सुरक्षा शाखा के लोग काफी मुस्तैद रहे। इसके बावजूद आढ़तियों ने बेहद गोपनीय तरीके से मीटिंग कर अचानक ही मंडी का गेट बंद कर दिया। प्रशासन कुछ समझ पाता इससे पहले ही आढ़ती गेट बंद कर चुके थे। यहां आढ़तियों के नारों की आवाज सुनकर ही सचिव संजीव कुमार भी मौके पर पहुंचे।
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आज बनेगी आंदोलन की रणनीति
वहीं पिपली मामले के बाद अब भारतीय किसान यूनियन शनिवार को आंदोलन की रणनीति बनाएगी। इसमें यूनियन के राष्ट्रीय स्तर के नेता भी भाग लेंगे। हालांकि बीकेयू के प्रेस प्रवक्ता रामराजी ढुल ने इस बारे में बात करने से मना कर दिया, लेकिन यूनियन के सूत्रों अनुसार शनिवार को प्रदेश स्तरीय मीटिंग होगी।
सीटू ने पिपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज की निंदा की
जींद। सीटू जिला कमेटी ने पिपली में किसान रैली के दौरान हुए लाठीचार्ज की निंदा की है। जिला सचिव कपूर सिंह ने कहा कि प्रदेश के गृहमंत्री अनिल विज ने बयान जारी किया है कि अब रैली, धरने व प्रदर्शनों के लिए पहले अनुमति लेनी पड़ेगी। कपूर सिंह ने कहा कि जब पूरे देश में अनलॉक-4 के तहत 100 लोगों की राजनीतिक व सामाजिक तमाम तरह के आयोजनों में छूट दी जा रही है तो उस समय अपनी रोजी-रोटी के प्रश्नों को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों पर यह पाबंदियां लगाई जा रही हैं। यह पाबंदियां इस मुश्किल समय में अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे लोगों के जनतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

पिपली में किसानों पर हुए लाठीचार्ज के विरोध में नारेबाजी करते किसान।- फोटो : Jind

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