जींद। कोई भी किसान खेतों में फसल कटाई के बाद धान के अवशेषों में आग ना लगाए। फसल के फानों में आग न लगाकर उनको खेत में ही नष्ट कर दिया जाए। एसडीएम सत्यवान सिंह मान ने कहा कि पराली का प्रबंधन करने के लिए आज किसानों के सामने विकल्प मौजूद हैं।
इस पराली से चारा बन सकता है। पराली के बंडल बन सकते हैं और उसे खेत की मिट्टी में ही मिलाया जा सकता है। इस कार्य में कृषि विभाग से मशीनों की सहायता ली जा सकती है। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से प्रदूषण फैलता है जो कि सेहत के लिए हानिकारक है।
खेत में आग लगाने की वजह से भूमि की उपजाऊ शक्ति क्षीण होती है और अनेक जीव उसी में जलकर मर जाते हैं। प्रदेश सरकार ने फसल प्रबंधन के लिए सीआरएम स्कीम लागू की हुई है, जिसका किसानों को लाभ उठाना चाहिए। इस योजना में पराली नहीं जलाने वाले किसान को 1200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाती है।
पराली जलाने वाले के व्यक्ति के खिलाफ 30 हजार रुपये जुर्माना और छह महीने तक की सजा हो सकती है। इसके अलावा उसे मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर दो साल के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है। इसलिए सभी आम जन और खेती के हित को ध्यान में रखते हुए किसानों को पराली का उचित प्रबंधन करना चाहिए।