20जेएनडी10-फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर डूमरखा कलां गांव के खेतों में पहुंची एसडीएम डॉ. किरण सिंह।
उचाना। फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर एसडीएम डॉ. किरण सिंह ने बुधवार को उपमंडल के गांव डूमरखां कलां का दौरा किया। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे उपकरणों के माध्यम से पराली का प्रबंधन करना सुनिश्चित करें ताकि वातावरण प्रदूषित ना हो। उन्होंने कहा कि जो किसान फसल अवशेष प्रबंधन करता है, उन्हें राज्य सरकार द्वारा किसान हितेषी जन कल्याणकारी योजनाओं एवं कृषि यंत्रों पर अनुदान दिया जाता है।
डॉ. किरण ने बताया कि धान के अवशेष व पराली जलाने से मिट्टी की उर्वरता शक्ति कम होती है, क्योंकि आग लगने से मिट्टी में प्राकृतिक रूप से उपलब्ध जीवाश्म, नाइट्रोजन, फास्फोरस व अन्य महत्वपूर्ण पोषक तत्व नष्ट हो जाते है। इसके साथ-साथ फसलों में किसानों के सहायक मित्र कीट भी जलकर नष्ट हो जाते है। पराली जलाने से पर्यावरण भी प्रदूषित होता है। इससे स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण बुजुर्गों, बच्चों व सांस के रोगियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। वर्तमान समय में वायु प्रदूषण इतना बढ़ चुका है कि स्कूल प्रशासन द्वारा स्कूली बच्चों की छुट्टियां तक भी करनी पड़ गई है।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन करने के लिए कस्टम हायरिंग केंद्र से ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया कि खेतों में पराली न जलाने पर किसानों को एक हजार रुपये प्रति एकड़ का प्रावधान है। फसल अवशेष प्रबंधन करने वाले किसान लाभ लेने के लिए 30 नवंबर तक पोर्टल पर अपना पंजीकरण करवा सकते हैं।