खटकड़ टोल पर किसानों के बीच पहुंचे इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला का विरोध करते धरना दे रहे किसा
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इनेलो सुप्रीमो एवं पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला रविवार दोपहर को खटकड़ टोल प्लाजा पर किसानों के बीच पहुंचे। यहां पर उनको माइक देने के लिए काफी देर तक हाई वोल्टेज ड्रामा चलता रहा। कुछ किसान चौटाला को माइक देने की बात कह रहे थे तो कुछ इसे नियमों का उल्लंघन बता रहे थे। काफी देर तक ओमप्रकाश चौटाला माइक के इंतजार में खड़े रहे। आखिर में उन्होेंने अपने माइक से सभी को राम-राम कहकर निकल गए। खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर बरसोला ने चौटाला पर उन्हें डोगा (छड़ी) मारने का आरोप लगाया है।
इनेलो के नेता दो-तीन दिन से प्रचार कर रहे थे कि ओमप्रकाश चौटाला खटकड़ टोल प्लाजा पर आएंगे और किसानोें को संबोधित करेंगे। किसानों ने अब तक धरने के दौरान किसी भी नेता को अपना माइक नहीं दिया है, इसलिए नियमों का हवाला देते हुए उन्होंने ओमप्रकाश चौटाला को भी माइक नहीं दिया। कुछ किसान चौटाला को माइक देने की बात कह रहे थे, पर कुछ विरोध कर रहे ते। काफी देर तक चौटाला धरने पर किसानों के बीच रहे। लेकिन उन्हें माइक नहीं दिया गया। इसके बाद वह बद्दोवाल टोल प्लाजा के लिए निकल गए। पूर्व सीएम की गाड़ी को उनके पौत्र कर्ण चौटाला चला रहे थे।
खेड़ा खाप के प्रधान सतबीर पहलवान ने कहा कि किसान आंदोलन को समर्थन देने पर इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला का स्वागत करते हैं। खटकड़ टोल पर किसानों के धरने पर एक नियम बनाया हुआ है कि किसी भी राजनेता को मंच से बोलने के लिए माइक नहीं दिया जाएगा। यहां पर इससे पहले दीपेंद्र हुड्डा, रणदीप सुरजेवाला, आम आदमी पार्टी राज्यसभा सदस्य सुशील गुप्ता भी आ चुके हैं। किसानों के बीच बैठकर उनका समर्थन राजनेता कर सकते हैं। लेकिन मंच का माइक उन्हें नहीं दिया जाएगा। कुछ दिन पहले इनेलो जिलाध्यक्ष को इसको लेकर साफ कह दिया गया था कि इनेलो सुप्रीमो को धरनास्थल पर माइक नहीं दिया जाएगा। इस मौके पर नफे सिंह राठी, बलराज नगूरां, सत्ता डूमरखां, वकील करसिंधु सहित अन्य इनेलो नेता भी मौजूद रहे।
पूर्व सीएम पर डोगा मारने का लगाया आरोप
खेड़ा खाप प्रधान सतबीर पहलवान बरसोला ने पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला पर उनको डोगा (छड़ी) मारने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह उन्हें नमस्ते करने के लिए गए थे। लेकिन वे बोले कि दूर हट मेरे से और मेरे पांव पर डोगा मारा। बरसोला ने कहा कि हमने पूर्व सीएम के सम्मान में कोई कमी नहीं छोड़ी। कुर्सी, चाय, दूध तक हम उनके लिए लेकर आए। उनकी किसी राजनेता से लड़ाई नहीं है। उनकी लड़ाई सरकार के साथ है। राजनेताओं पर हम विश्वास नहीं करते। कोई भी राजनेता दिल्ली धरने पर बैठकर किसानों का समर्थन कर सकता है।