जींद। संयुक्त किसान मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को किसान संगठनों ने अपनी मांगों को लेकर शहर में प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति की प्रतियां फूंकीं। बाद में कार्यकर्ताओं ने लघु सचिवालय पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीसी को सौंपा।
किसान संगठनों ने जगजीत सिंह डल्लेवाल की जान बचाने, दिल्ली जा रहे किसानों पर हो रही कार्रवाई को बंद करने, नोएडा-ग्रेटर नोएडा के सभी किसानों को रिहा करने तथा राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति वापस लेने समेत अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन का नेतृत्व किसान सभा के राज्य प्रधान मास्टर बलबीर सिंह, भाकियू (घासीराम) के राज्य प्रधान जोगेंद्र नैन व भाकियू (टिकैट) के बारूराम ने किया।
बलबीर सिंह ने कहा कि मोदी नेतृत्व वाली केंद्र सरकार किसान संगठनों और मंचों से जानबूझ कर बातचीत नहीं कर रही है। यही वजह है कि किसानों में केंद्र सरकार के खिलाफ रोष है। केंद्र सरकार 9 दिसंबर 2021 को संयुक्त किसान मोर्चा के साथ हस्ताक्षरित समझौते का उल्लंघन कर रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने 16, 17, 18 जुलाई 2024 को प्रधानमंत्री, संसद के दोनों सदनों के विपक्ष नेताओं और संसद सदस्य को ज्ञापन सौंपे थे। किसानों ने 9 अगस्त 2024 को पूरे देश में कृषि पर कॉरपोरेट नियंत्रण के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। किसान नेता बारूराम ने बताया कि नोएडा व ग्रेटर नोएडा के 109 किसानों को झूठे केस में फंसा कर उनको 21 दिन से जेल में बंद किया गया है। इन किसानों पर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं। उनको तुरंत रिहा किया जाए। केंद्र सरकार नई राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति लेकर आ रही है, जो तीन कृषि कानून को पिछले दरवाजे से फिर से लागू करने की कॉरपोरेट एजेंडे की रणनीति का हिस्सा है। हम इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। इस अवसर पर डिंपल दनौदा, बलविंद्र, ज्ञानी राम, वेदप्रकाश, आजाद पालवा, छाजूराम मौजूद रहे।
यह हैं मांगें
सरकार किसान संगठनों के साथ बात करें और किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल की जान बचाए।
दिल्ली कूच करने वाले किसानों का दामन रोकें।
नोएडा व ग्रेटर नोएडा के सभी किसानों को जेल से रिहा करे।
राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति को वापस ले।
सभी किसान संगठनों के साथ तत्काल चर्चा करे और सभी लंबित मुद्दों का समाधान करे।