शहर की अनाजमंडी में पड़ा गेहूं।
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जींद। केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर 14 मई को प्रतिबंध लगाया था। इसके बाद जिन लोगों ने गेहूं को महंगे दामों पर बेचने के सपने संजो रखे थे। अब उनके लिए गेहूं को मंडियों में बेचने के लिए मजबूरी बनी हुई है। प्रदेश में कई स्थानों पर गेहूं एमएसपी से 200 रुपये प्रति क्विंटल अधिक दामों पर बिका। इसके बाद जिले में भी कुछ किसानों ने गेहूं का स्टॉक महंगे दामों पर बेचने की नीयत से किया था।
केंद्र सरकार ने निर्यात पर प्रतिबंध लगाने के बाद गेहूं के दामों में गिरावट आई गई और जिन किसानों व आढ़तियों ने गेहूं का स्टॉक किया था, उनको अब गेहूं को एमएसपी पर बेचने के लिए ही मजबूर होना पड़ रहा है। हालांकि शहर की अनाजमंडी में अब तक ज्यादा मात्रा में गेहूं प्रतिबंध के बाद नहीं आया। शहर की मंडियों में एमएसपी से 100 रुपये ज्यादा के भाव पर थोड़ा बहुत गेहूं आटा चक्की व घरेलू प्रयोग के लिए शहरवासियों ने ही खरीद की है। व्यापारियों से मिले लालच के चक्कर में जिन किसानों ने अपने गेहूं का भंडारण कर लिया और सरकारी एजेंसियों को एमएसपी पर नहीं बेचा, अब वह सरकारी एजेंसियों को 31 मई तक एमएसपी पर गेहूं बेच सकते हैं। इसके लिए एजेंसियां मंडियों में पहुंच चुकी हैं।
31 मई तक होगी खरीद
मंडी में सरकार के निर्देशानुसार अब 31 मई तक गेहूं की खरीद की जाएगी। फिलहाल मंडी में गेहूं लेकर कोई किसान नहीं आ रहा है। निर्यात पर 14 मई को प्रतिबंध लगने के बाद किसान व आढ़तियों की गेहूं की खरीद रुकी हुई है। अब 31 मई तक गेहूं की खरीद होगी।
--संजीव कुमार मंडी सचिव जींद।