जींद/नरवाना। दातासिंह वाला बॉर्डर पर सोमवार को किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। इस दौरान डब्ल्यूटीओ (वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाइजेशन) के बारे में जानकारी दी गई। किसानों के लिए समझौते को खतरनाक बताया और भारत को इससे बाहर करने की मांग की गई। इसके बाद किसानों ने सरकार और डब्ल्यूटीओ का 20 फुट ऊंचा पुतला फूंका। किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने कहा कि जब तक किसानों की मांग पूरी नहीं होंगी, तब तक वह नहीं लौटेंगे। दिल्ली कूच की तैयारी जारी रहेगी। अंतिम निर्णय 29 फरवरी को लिया जाएगा।
दातासिंह वाला बार्डर पर लगाए हुए मंच पर सोमवार को भी वक्ताओं ने किसानों को संबोधित किया। वक्ताओं ने किसानों की मांगों को सही ठहराते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करवाई। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि किसानों की मांगें जब ही पूरी होंगी, जब डब्ल्यूटीओ से भारत बाहर होगा। उन्होंने इसके फायदे और नुकसान के बारे में किसानों को बताया।
डल्लेवाल की बातों का सभी किसानों ने एक मत से समर्थन किया। इसके बाद यहीं बार्डर पर डब्ल्यूटीओ के पुतले का दहन किया गया। किसान संगठनों के आह्वान पर बार्डर के आसपास नेशनल हाईवे पर जहां किसानों ने ट्रैक्टर खड़े किए। वहीं हरियाणा में भी किसानों ने हाईवे पर ट्रैक्टरों को खड़े कर रोष प्रकट किया। नरवाना शहर के लगते गांव हथो, ढाकल व डूमरखां में किसानों ने ट्रैक्टर खड़े किए। दनौदा में पुतलों का दहन किया गया।
किसान ही नहीं मजदूर के लिए भी समझौता खतरनाक
डल्लेवाल ने कहा कि यह विरोध केवल एक किसान द्वारा नहीं किया जा रहा है। वह मजदूर भी कर रहा है, जो किसान के खेतों में काम करता है। किसान को अपनी फसल का दाम पूरा नहीं मिल पा रहा है। न ही फसल को निर्यात किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की फसल को मानक पर खरा नहीं उतरने की बात कह दी जाती है। अगर देश के अन्नदाता की फसल दूसरे देश में बिकेगी, तो उसका दाम भी बढ़ेगा। इसके बाद किसान खुशहाल की जिंदगी जी सकता है। इसलिए सरकार से उनकी मांग यह है कि विश्व व्यापार संगठन से भारत को बाहर लाया जाए।
शांति मार्च आज
दातासिंह वाला बार्डर पर 27 फरवरी को शांति मार्च निकाला जाएगा। किसान-मजदूर व गैर राजनैतिक संगठन की बैठक होगी। इसमें विभिन्न मुद्दों को लेकर विचार-विमर्श किया जाएगा। वहीं गांव दनौदा के ऐतिहासिक चबूतरे पर बिनैन खाप की बैठक पर सबकी नजर रहेगी। इस बैठक में किसान आंदोलन को लेकर फैसला लिया जाएगा।