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एंबुलेंस में मरीज के साथ नहीं गया ईएमटी, फर्जी तरीके से हाजिरी भी लगाई

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नागरिक अस्पताल में खड़ी एंबुलेंस का फोटो। संवाद - फोटो : Jind
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जींद। नागरिक अस्पताल में मरीजों के लिए तैनात एंबुलेंस सेवा का यहां कर्मचारी दुरुपयोग करते हैं। वह फर्जी तरीके से हाजिरी लगाकर मरीजों की जान को जोखिम में डालते हैं। इससे साफ है कि यहां पर तैनात कर्मचारी न तो ईमानदारी के साथ कार्य करते हैं और न ही अपनी ड्यूटी के प्रति सचेत रहते हैं। यह एक जांच में सामने आया है।
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जांच में साफ हुआ है कि एंबुलेंस के साथ मरीज को बिना ईएमटी के भेजा गया। इसमें एंबुलेंस चालक और कंट्रोल रूम ऑपरेटर ने मिलीभगत करके ईएमटी की हाजिरी भी लगाई एवं उच्चाधिकारियों को गुमराह किया। जांच अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट सिविल सर्जन को सौंपते हुए तीनों को दोषी करार दिया है।
23 जुलाई 2021 को एक एंबुलेंस जींद से एक गर्भवती महिला को लेकर रोहतक गई थी। एंबुलेंस में एक एमईटी की भी ड्यूटी होती है। इस एंबुलेंस पर तैनात ईएमटी दलजीत ने कंट्रोल रूम आपरेटर धर्मबीर के साथ मिलीभगत करके अपनी हाजिरी लगवा दी। एंबुलेंस को ड्राइवर सतेंद्र लेकर रोहतक गया। अगले दिन रेफरल ट्रांसपोर्ट के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. राजेश भोला ने पूछा कि रात को आठ बजे एंबुलेंस में कौन ईएमटी गया था। एंबुलेंस चालक सत्येंद्र और कंट्रोल रूम ऑपरेटर धर्मवीर ने कहा कि दलजीत गया था। जब डॉ. भोला ने रोहतक रेफर किए गए मरीज से बात की तो उन्होंने बताया कि उनके साथ एंबुलेंस में ड्राइवर के अलावा कोई भी अन्य व्यक्ति नहीं था। बीच रास्ते में उनके मरीज को भी परेशानी हो गई थी। इस पर उन्होंने जांच की तो पाया कि ईएमटी दलजीत ने फर्जी तरीके से ऑपरेटर व ड्राइवर से मिलीभगत करके अपनी हाजिरी लगवाई और ड्यूटी से नदारद रहा। डॉ. राजेश भोला ने तीनों को अपनी जांच में दोषी करार देते हुए सिविल सर्जन को कार्रवाई के लिए लिखा था। इसके बाद तीनों ने डॉ. राजेश भोला पर आरोप लगाए कि डॉ. भोला ने दुर्भावना से उनको जांच में दोषी करार दिया है। इसके बाद सिविल सर्जन ने यह जांच डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. पालेराम कटारिया से करवाई। डॉ. पालेराम को भी जांच में तीनों की मिलीभगत और ड्यूटी में लापरवाही मिली। उन्होंने अपनी जांच पूरी करके रिपोर्ट सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया को सौंप दी है।
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पहले भी आ चुके हैं इस तरह के मामलेे
इससे पहले भी एंबुलेंस चालकों के इस प्रकार के मामले सामने आ चुके हैं। मार्च महीने में ही एक एंबुलेंस रोहतक गई थी, लेकिन वह 12 घंटे बाद लौटी। ड्राइवर ने बताया कि एंबुलेंस खराब हो गई थी, लेकिन उसकी लोकेशन रोहतक की बजाय गोहाना मिली थी। इस मामले की भी जांच हुई और जांच में ड्राइवर व ईएमटी की मिलीभगत मिली। इस प्रकार नागरिक अस्पताल में एंबुलेंस कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण सरकार को तो चूना लगता ही है, साथ ही मरीजों की जान भी जोखिम में रहती है।
सिविल सर्जन डॉ. जेएस पूनिया ने बताया कि जांच रिपोर्ट मिली चुकी है। फिलहाल उसका अध्ययन नहीं किया गया है। यदि इसमें एंबुलेंस कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। मरीजों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं होगा।
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